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Tuesday, March 17, 2026

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की तिथियां घोषित, जानें ऑनलाइन पंजीयन की पूरी प्रक्रिया

गरीब, जरूरतमंद, निराश्रित परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए आयोजित किए जाने वाले मुख्यमंत्री कन्या विवाह/ निकाह योजना के लिए तिथियों का निर्धारण किया गया है। इनमें अक्षय तृतीया 19 अप्रैल 2026, देवउठनी ग्यारस (तुलसी विवाह) 20 नवंबर 2026, बसंत पंचमी 11 फरवरी 2027 तथा एक अन्य तिथि स्थानीय मांग और कलेक्टर के निर्णय अनुसार निर्धारित की जा सकती है। वर्ष 2026-27 में पक्ष 44 हजार से अधिक विवाह करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस पर राज्य सरकार 242 करोड़ से अधिक राशि व्यय करेगी।


प्रमुख सचिव सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाय योजना के प्रभावी व्यवस्थि और गरिमापूर्ण ढंग से आयोजन के लिए विभाग द्वारा सामूहिक विवाह समारोह में भाग लेने वाले जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 और अधिकतम संख्या 200 निर्धारित की गई है। प्रदेश के 55 जिलों में इन अवसरों पर 800 जोड़े यानिकी 44 हजार जोड़ों का विवाह संभव हो सकेगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 51 हजार 899 मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना तथा 28 हजार 362 मुख्यमंत्री निकाह कराए गए हैं। इन हितग्राहियों से 321 करोड़ 41 लाख 58 हजार की सहायता प्रदान की गई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में भाग लेने के लिए ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीयन कराया जा सकता है।


मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए आधिकारिक पोर्टल vivahportal.mp.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों के विवाह के लिए ₹49,000 की वित्तीय सहायता व अन्य सामग्री प्रदान की जाती है। आवेदन विवाह की तारीख से 15 दिन पहले किया जाना चाहिए।


मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के लिए ऑनलाइन पंजीयन प्रक्रिया:

  • आधिकारिक वेबसाइट: सबसे पहले विवाह पोर्टल की आधिकारिक वेबसाइट https://vivahportal.mp.gov.in/ पर जाएं।
  • लॉगिन/पंजीयन: पोर्टल पर दी गई प्रक्रिया के अनुसार वर-वधू की जानकारी दर्ज करें।
  • दस्तावेज़ अपलोड: आवश्यक दस्तावेज़ जैसे आधार कार्ड, समग्र आईडी, बैंक पासबुक, आय प्रमाण पत्र, और निवास प्रमाण पत्र अपलोड करें।
  • आवेदन जमा करें: फॉर्म भरने के बाद उसे सबमिट करें और प्रिंट आउट ले लें।
  • सत्यापन: भरे हुए फॉर्म का प्रिंट आउट और सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ स्थानीय निकाय (नगर निगम/नगर पालिका/पंचायत) में संपर्क कर सत्यापन करवाएं।


पात्रता और महत्वपूर्ण विवरण:

  • मूल निवासी: कन्या मध्यप्रदेश की मूल निवासी होनी चाहिए।
  • आयु सीमा: कन्या की आयु 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
  • लाभार्थी: जरूरतमंद, निराश्रित, निर्धन या मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के तहत पात्र परिवार।
  • सहायता राशि: सामूहिक विवाह कार्यक्रम के माध्यम से 49,000 रुपये का चेक और 6,000 रुपये आयोजन व्यय के लिए दिए जाते हैं।


ध्यान दें: यह लाभ केवल सामूहिक विवाह समारोहों में ही उपलब्ध होता है। अधिक जानकारी के लिए, आप सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

Monday, February 9, 2026

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं को दी जा रही हैं निशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं

Sehore| प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जिले की गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान प्रसव पूर्व देखभाल के लिये प्रत्येक माह की 09 एवं 25 तारीख को जिले के स्वास्थ्य केंद्रों पर देखभाल एवं स्वास्थ्य सेवाओं का निशुल्क लाभ प्रदान किया जा रहा है, ताकि गर्भावस्था और प्रसव के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। अभियान के तहत 09 फरवरी को जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर  841 गर्भवती महिलाओं की स्वास्थ्य जांच की गई, जिसमें  203 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क पाई गईं।


सीएमएचओ श्री सुधीर कुमार डेहरिया ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना हैं।  इस योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को निशुल्क जाँच, दवाएं, एवं परामर्श दिया जा रहा है। अभियान के तहत उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान एवं विशेष देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। इसके तहत प्रसव के समय जटिल अवस्था में उच्च चिकित्सा केन्द्रो में रेफर किया जाता है। गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य जाँच के लिये निशुल्क पिक अप एवं ड्राप की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।

Sunday, January 25, 2026

सुकन्या समृद्धि योजना में पायें 8.2% ब्याज

सुकन्या समृद्धि योजना 2015 में शुरू हुई इस सरकारी बचत योजना में बेटी के नाम पर छोटी-छोटी रकम जमा करके बड़ी पूंजी तैयार की जा सकती है। निवेश पर अच्छा ब्याज मिलता है, और यह पूरी तरह सुरक्षित है। अकाउंट पोस्ट ऑफिस या चुनिंदा बैंक में खोल सकते हैं।


सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का मकसद बेटी की पढ़ाई, शादी या दूसरे जरूरी खचों के लिए पैसे जमा करना है। सुकन्या समृद्धि योजना के नियम के अनुसार 15 साल तक पैसा जमा करना होता है और 21 साल पर मैच्योरिटी मिलती है, यानी 6 साल तक बिना नया पैसा डाले ब्याज मिलता रहता है। मौजूदा ब्याज दर 8.2% है जिसमें बदलाव संभव है। 


अगर आप बेटी के जन्म पर उसके लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोलते हैं। 15 साल तक हर माह 12,500 रुपए या अपनी सुविधा के अनुसार सालाना 1.5 लाख रुपए जमा करते हैं। मौजूदा ब्याज 8.2% सालाना कंपाउंड होता है। 21 साल बाद मैच्योरिटी के समय आपके पास 72 लाख रुपए जमा हो सकते हैं। कैलकुलेशन ऐसा हैः हर साल की जमा रकम अलग-अलग वर्षों तक बढ़ती है। पहली साल की 1.5 लाख पर 21 साल ब्याज मिलेगा, दूसरी पर 20 साल, और आखिरी 15वीं जमा पर 7 साल ब्याज मिलेगा।


मैच्युरिटी रकम करीब 71.82 लाख होती है,। इसे राउंड करके 72 लाख कह सकते हैं। इसमें कुल निवेश 22.5 लाख रु. है, जबकि बाकि 49 लाख से ज्यादा रुपया ब्याज से आता है। अगर भविष्य में ब्याज दर बढ़ी, तो और ज्यादा मिलेगा। ध्यान रखें : खाता खोलने के लिए बेटी की उम्र 10 साल से कम होनी चाहिए। एक परिवार में अधिकतम दो बेटियों का खाता खुल सकता है। जुड़वां बेटियां हैं, तो 3 तक की छूट है। बीच में पैसे निकालने के नियम सख्त हैं। सिर्फ बेटी की पढ़ाई के लिए 50% तक 18 साल बाद, या गंभीर बीमारी में। खाता समय से पहले बंद करना पड़े, तो ब्याज दर कम हो जाती है।

Monday, December 15, 2025

राष्ट्रीय वयोश्री योजना: वरिष्ठ नागरिकों को शारीरिक सहायता और सहायक जीवन उपकरण प्रदान करने की योजना

केंद्र सरकार का सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY) संचालित करता है। इसमें बुजुर्गो को उम्र-संबंधी विकलांगताओं के लिए वॉकर, व्हीलचेयर, सुनने की मशीन जैसे उपकरण फ्री दिए जाते हैं। इसका लाभ ऐसे वरिष्ठ नागरिक ले  सकते हैं, जिनकी मासिक आय 15 हजार रूपए से कम है। 


लाभ लेने के लिए जरूरी पात्रता

60 साल से अधिक की उम्र के वे व्यक्ति, जिनके पास बीपीएल, एपीएल कार्ड है इसके लिए पात्र हैं। दस्तावेजों में आधार कार्ड, राशन कार्ड, पहचान पत्र, वृद्धावस्था पेंशन का प्रमाण, विकलांगता की मेडिकल रिपोर्ट, पासपोर्ट साइज फोटो जरूरी हैं। 


ये है आवेदन करने की प्रक्रिया

समाज कल्याण विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.alimco.in पर जाएं। होम पेज पर क्लिक करते ही रजिस्ट्रेशन फॉर्म खुलेगा। जानकारी भरने के बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सबमिट कर दें।

Tuesday, November 4, 2025

जानिए सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप प्रोग्राम के बारे में

सीबीएसई की ओर से सिंगल गर्ल चाइल्ड स्कॉलरशिप प्रोग्राम 2025-26 की घोषणा की गई है। अपने माता-पिता की इकलौती (पुत्री) संतान के रूप में छात्राएं इसके लिए अप्लाई कर सकती है। 


जानिए आवेदन प्रक्रिया एवं आवश्यक बातें

  • इस प्रोग्राम के तहत सीबीएसई बोर्ड से 10वीं क्लास पास कर चुकी छात्राएं ही आवेदन हेतु योग्य हैं।
  • आवेदक छात्रा ने 10वीं क्लास में कम से कम 70 फीसदी अंक प्राप्त किए हों।
  • छात्रा 11वीं या 12वीं क्लास में नामांकन करवा चुकी हो यानी जूनियर या सीनियर क्लास की छात्राएं ही इस स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकती हैं। 
  • अप्लाई करने के लिए छात्राएं सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in विजिट कर सकती हैं और यहां दी गई डिटेल्स के आधार पर अपनी दावेदारी सुनिश्चित कर सकती हैं। अपने सभी दस्तावेज रेडी कर लें। 

Tuesday, September 30, 2025

वरिष्ठ नागरिकों के लिए संवेदनशील पहल, बदल रही है वृद्धजनों की जिंदगी


भारत की संस्कृति में वृद्धजनों को सदैव ज्ञान, अनुभव और परंपरा की धरोहर के रूप में सम्मानित किया गया है। मध्य प्रदेश सरकार ने इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण, सुरक्षा और सम्मान के लिए अनेक योजनाओं और कार्यक्रमों को लागू किया है। बदलते सामाजिक ढांचे, एकल परिवार व्यवस्था और तेज़ जीवन शैली में वृद्धजनों को अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाता, ऐसे में राज्य सरकार उनके जीवन को गरिमामय और सुरक्षित बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है।


भरण-पोषण से सम्मान तक : वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजनाओं का समग्र दृष्टिकोण


मध्य प्रदेश में समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना वरिष्ठ नागरिकों के लिए राहत की एक बड़ी पहल है। इस योजना के अंतर्गत राज्य के 15.75 लाख से अधिक वृद्धजन नियमित रूप से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्हें प्रति माह ₹600 पेंशन राशि प्रदान की जा रही है, वर्ष 2024-25 में 1143 करोड़ 53 लाख रूपये की राशि पेंशन के रूप में वितरित की गई है, जिससे उनकी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति में सहूलियत हो रही है। विशेष उल्लेखनीय तथ्य यह है कि इनमें 2.71 लाख से अधिक निराश्रित वृद्धजन भी सम्मिलित हैं। ऐसे वरिष्ठ नागरिक जिनकी देखभाल के लिए परिवार या कोई निकट संबंधी उपलब्ध नहीं है, उनके लिए यह पेंशन योजना जीवन का सहारा बन रही है।


माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण नियम 2009 बना सहारा


वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य में माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण तथा कल्याण नियम, 2009 लागू है। इस नियम के अंतर्गत बच्चों और अभिभावकों पर अपने वृद्ध माता-पिता की देखभाल का कानूनी दायित्व निर्धारित किया गया है। साथ ही, यदि कोई वरिष्ठ नागरिक उपेक्षित होता है, तो उसे न्याय और राहत प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है।


निराश्रित और असहाय वरिष्ठ नागरिकों के लिए आश्रय एवं पेंशन व्यवस्था


वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान और उनकी सहायता के लिए राज्य में सीनियर सिटिजन हेल्पलाइन स्थापित की गई है। यह हेल्पलाइन 24×7 कार्यरत रहती है और वृद्धजनों की शिकायतों का निवारण सुनिश्चित करती है।


भोपाल में 24 करोड़ रूपये की लागत से पांच एकड़ में सीनियर सिटिजन होम की स्थापना की गई है, जहाँ अकेले, निराश्रित या असहाय वृद्धजन सुरक्षित वातावरण में जीवन-यापन कर सकते हैं। इन सेवा-गृहों में स्वास्थ्य, भोजन, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके साथ ही अशासकीय संस्थाओं के माध्यम से 81 वरिष्ठ/वृद्धजन आश्रम संचालित किए जा रहे हैं।


एक अक्टूबर को सम्मान कार्यक्रमों से वृद्धजनों की भूमिका का अभिनंदन


मध्य प्रदेश सरकार केवल भरण-पोषण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वृद्धजनों के सम्मान और सामाजिक सहभागिता को भी प्राथमिकता देती है। हर वर्ष एक अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर प्रदेश भर में विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस अवसर पर विभिन्न जिलों में वरिष्ठ नागरिकों को सम्मान समारोह के माध्यम से उनकी भूमिका और योगदान के लिए सराहा जाता है।


विशेष रूप से 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके वृद्धजनों को ‘शतायु सम्मान’ प्रदान किया जाता है। एक अक्टूबर 2024 को 70 वरिष्ठजनों को शतायु सम्मान दिया गया है। यह आयोजन न केवल उन्हें सम्मानित करता है, बल्कि समाज को यह संदेश भी देता है कि वृद्धजन हमारे प्रेरणा स्रोत और पथप्रदर्शक हैं।


सरकार का लक्ष्य : हर वृद्धजन के जीवन में सुरक्षा, गरिमा और सम्मान


वरिष्ठ नागरिकों के लिए चलाई जा रही योजनाएँ केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके मानसिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कल्याण को भी समाहित करती हैं। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है, कि वृद्धजन समाज से कटें नहीं, बल्कि वे अपनी गरिमा के साथ सक्रिय और सामाजिक जीवन जी सकें।


मध्य प्रदेश सरकार के इन प्रयासों से यह स्पष्ट है कि राज्य वृद्धजनों के लिए संवेदनशील और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाए हुए है। समग्र सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना, भरण-पोषण एवं कल्याण नियम 2009, सीनियर सिटिजन हेल्पलाइन, सेवा गृह और सम्मान कार्यक्रम जैसे कदम वृद्धजनों के जीवन में सुरक्षा, गरिमा और आत्मनिर्भरता का संचार कर रहे हैं।


यह पहल न केवल वरिष्ठ नागरिकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह सीख भी देती है कि वृद्धजनों का सम्मान और देखभाल ही एक सशक्त मानवीय समाज की पहचान है।


(लेखक श्री नारायण सिंह कुशवाह - मध्यप्रदेश शासन में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रंसस्करण मंत्री है)

Sunday, September 28, 2025

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का व्यक्तित्व पूरे विश्व का प्रेरणा स्रोत



प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का व्यक्तित्व आज पूरे विश्व में प्रेरणा का स्रोत है। उनके नेतृत्व में भारत ने अभूतपूर्व गति से प्रगति पथ पर कदम बढ़ाए हैं। उनके जन्मदिवस पर हम सभी कृतार्थ अनुभव कर रहे हैं और उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करते हैं। उन्होंने भारत को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के साथ ही भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” का उनका मंत्र आज राष्ट्र निर्माण का सबसे बड़ा आधार बन चुका है।


प्रधानमंत्री मोदी जी का नेतृत्व उस समय और अधिक प्रभावी सिद्ध हुआ जब दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही थी। विषम परिस्थितियों में उन्होंने भारत को न केवल सुरक्षित रखा बल्कि प्रगति की नई दिशा भी दी। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में मजबूती से अग्रसर है। यह उपलब्धि केवल आर्थिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी अमूल्य धरोहर है। वास्तव में प्रधानमंत्री जी के प्रयास भारत को विश्वगुरु के स्थान तक ले जाने वाले हैं। उनकी सोच वसुधैव कुटुम्बकम की भावना को साकार करती है, जो आज के वैश्विक परिदृश्य में शांति और सामूहिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त कर रही है।


स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी जी के कार्य ऐतिहासिक हैं। पहले कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि कोई सरकार 60 करोड़ से अधिक लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर सकती है। लेकिन आयुष्मान भारत योजना ने इसे साकार कर दिखाया। करोड़ों गरीब परिवारों को आयुष्मान कार्ड प्रदान कर उन्हें निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है। 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए ‘वयवंदना योजना’ के तहत 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा ने उन्हें नई आशा और आत्मविश्वास दिया है। कोविड-19 महामारी के कठिन समय में स्वदेशी वैक्सीन का निर्माण और देशव्यापी टीकाकरण अभियान ने भारत को दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में खड़ा कर दिया।


जनकल्याण के क्षेत्र में भी प्रधानमंत्री जी का योगदान असाधारण है। किसानों, गरीबों, महिलाओं और युवाओं के विकास के लिए उन्होंने ऐसी योजनाएँ शुरू कीं, जो सीधे उनकी जिंदगी बदलने वाली सिद्ध हुईं। जल जीवन मिशन के माध्यम से हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुँचाने का अभियान केवल स्वास्थ्य और स्वच्छता ही नहीं बल्कि ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने का भी प्रतीक है। यह पहल उतनी ही परिवर्तनकारी है जितनी अटल जी की प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना थी, जिसने देश के गाँवों को नई पहचान दी थी।


आर्थिक मोर्चे पर मोदी जी के नेतृत्व ने भारत को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया है। एक समय 11वें स्थान पर रही भारतीय अर्थव्यवस्था आज चौथे स्थान पर पहुँच गई है और जापान जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ चुकी है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ जैसे अभियानों ने न केवल भारत को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि देश को नवाचार और प्रौद्योगिकी का केंद्र भी स्थापित किया है।


अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है। जी-20 की अध्यक्षता और वैश्विक मंचों पर भारत की सशक्त भूमिका ने यह प्रमाणित कर दिया है कि भारत अब केवल उभरती हुई शक्ति नहीं, बल्कि दुनिया का पथप्रदर्शक है। प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर दृढ़तापूर्वक अग्रसर है।


वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो सपना प्रधानमंत्री जी ने रखा है, वह केवल एक लक्ष्य नहीं बल्कि राष्ट्रीय संकल्प है। यह संकल्प आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक सभी क्षेत्रों में भारत को विश्वगुरु बनाने वाला है। आज पूरा देश गर्व और उत्साह से इस यात्रा में सहभागी है।


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के जन्मदिवस पर उन्हें हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित करता हूँ। उनका नेतृत्व भारत को निरंतर नई ऊँचाइयों पर ले जा रहा है और आने वाले वर्षों में भारत निश्चित रूप से विश्वगुरु के रूप में स्थापित होगा।


(लेखक श्री राजेन्द्र शुक्ल, मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं)

Thursday, September 11, 2025

जीआईएस-2025 ने खोले तकनीकी उद्यमिता और अवसरों के द्वार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश तकनीकी उद्यमिता में भविष्य का प्रतिनिधित्व करने के लिये तैयार हो रहा है। प्रदेश अब देश की विकास यात्रा में सहभागी रह कर नित नये अध्याय लिख रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन पर आधारित राज्य सरकार की नीतियाँ, संस्थागत सहयोग और निवेशक-हितैषी ईकोसिस्टम राज्य के टियर-2 शहरों को भी विकास यात्रा में अग्रणी बनाने को तैयार है। ड्रोन, सेमीकंडक्टर, आईटी, एवीजीसी-एक्सआर और स्पेस-टेक जैसे क्षेत्रों में तेज़ी से प्रगति के लिए विशेष नीतियां बनाई गईं हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के निर्देशन में हुए क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय निवेश सम्मेलनों से प्रदेश निवेश का हब बन रहा है। उद्यमियों में मध्यप्रदेश के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजिनेस’ पर्यावरण में बढ़ता विश्वास आने वाले दशक को मध्यप्रदेश के लिये ‘एक्ज़ीक्यूशन डिकेड’ बना रहा है।

देश की विकास यात्रा महानगरों से टियर-2 शहरों की ओर बढ़कर नए औद्योगिक और तकनीकी अध्याय लिख रही है। मध्यप्रदेश इस परिवर्तन की अगुवाई करते हुए देश के उभरते ‘टेक्नोलॉजी पावरहाउस’ के रूप में स्थापित हो रहा है। फरवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) के बाद राज्य को ₹2,500 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए। इससे रोजगार के 30 हजार से अधिक अवसर सृजित होंगे।

राज्य सरकार की रणनीतिक योजनाओं, नवाचारपरक नीतियों और त्वरित कार्यान्वयन से यह सुनिश्चित हुआ है कि प्रदेश केवल योजनाएँ बनाने तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि धरातल पर ठोस परिणाम भी दिखाई दे रहे हैं। जीसीसी (Global Capability Centers), सेमीकंडक्टर, ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स, ऐक्सटेंडेड रियलिटी) और स्पेस-टेक जैसे फ्यूचरिस्टिक उद्यमिता क्षेत्रो में भी राज्य ने तेज़ी से अपनी पकड़ मज़बूत की है।

जीसीसी पॉलिसी से आकर्षित हो रहीं वैश्विक कंपनियां

राज्य सरकार की ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी 2025 के आकर्षक प्रावधानों से प्रदेश मध्यम आकार की वैश्विक कंपनियों का पसंदीदा निवेश स्थल बनता जा रहा है। भोपाल और इंदौर में पाँच प्रमुख कंपनियाँ, जिनमें डिजिटल कंसल्टेंसी, मेडिकल टेक्नोलॉजी, आईटी और फाइनेंशियल प्लानिंग से जुड़ी कंपनियाँ शामिल हैं, अपने संचालन केंद्र स्थापित कर रही हैं। प्रारंभिक चरण में ही इनसे 740 से अधिक उच्च-कौशल रोजगार सृजित होंगे। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर निवेशकों से सार्थक संवाद के परिणामस्वरूप प्रदेश देश का अग्रर्णी ‘जीसीसी-डेस्टिनेशन’ बनकर उभर रहा है।

विशेष ड्रोन नीति से गांवों तक पहुंच रही तकनीकी क्रांति

आईआईएसईआर भोपाल में ₹85.51 करोड़ की लागत से 60 हजार वर्गफुट क्षेत्र में फैला ‘एआई-एनेबल्ड ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ विकसित किया जा रहा है। इसे अत्याधुनिक यूएवी लैब्स, सिमुलेशन एनवायरमेंट, स्टार्टअप इनक्यूबेशन प्रोग्राम और ‘रेडी टू सपोर्ट इंडस्ट्रीज’ के दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा है। तीन वर्ष में यहाँ 200 से अधिक शोधकर्ता और प्रमाणित ड्रोन विशेषज्ञ तैयार होंगे। यह केंद्र 10 पेटेंट, 30 से अधिक शोध प्रकाशन और वाणिज्यिक तकनीकों के विकास पर काम कर रहा है। प्रशिक्षण, इनक्यूबेशन और आईपी कॉमर्शियलाइजेशन के माध्यम से यह केंद्र आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अग्रसर है।

सेमीकंडक्टर क्षेत्र में नवाचारों से विकसित हो रहा तकनीकी उद्यमिता का ईकोसिस्टम

अटल बिहारी वाजपेयी अखिल भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रबंधन संस्थान (एबीवी-आईआईआईटीएम) ग्वालियर में ₹14.67 करोड़ की लागत से ‘सेमीकंडक्टर साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ स्थापित किया जा रहा है। आने वाले पाँच वर्षों में यह केंद्र वीएलएसआई, आईओटी, ग्रीन चिप टेक्नोलॉजी और क्वांटम हार्डवेयर के क्षेत्र में अनुसंधान करेगा। इस केंद्र में प्रति वर्ष 150–200 सेमीकंडक्टर्स के विशेषज्ञ प्रोफेशनल्स तैयार किए जाएँगे। पाँचवें वर्ष तक यह केंद्र आत्मनिर्भर होकर देश का इनोवेशन हब बन जाएगा। इससे देश के सेमीकंडक्टर मिशन में नए पेटेंट, उत्पाद और स्टार्टअप्स का आधार सशक्त होगा।

इनक्यूबेशन सेंटर्स से सशक्त होगा स्टार्टअप ईकोसिस्टम

प्रदेश में स्टार्टअप ईकोसिस्टम को गति देने के लिए नए इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के सहयोग से इंदौर में DAV इनक्यूबेशन सेंटर,प्रारंभिक चरण में स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा है। आईआईटी इंदौर का DRISHTI CPS फाउंडेशन (₹4.89 करोड़) डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए नेशनल मिशन ऑन साइबर-फिजिकल सिस्टम्स के अंतर्गत स्थापित किया गया है। यह लगभग 100 स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान करेगा। वर्ष 2025 के अंत तक यह पूरी तरह तैयार होकर अपना काम प्रारंभ कर देगा। यहां फंडिंग प्रोग्राम, शेयर्ड वर्किंग स्पेस और स्टार्टअप एक्सेलेरेशन योजनाओं पर काम किया जाएगा।

टेक रियल एस्टेट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ी छलांग

मध्यप्रदेश में तकनीकी और डिजिटल अवसंरचना का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। इंदौर के ग्रोथ कॉरिडोर में एक वैश्विक आईटी सेवा कंपनी अपना बड़ा डिलीवरी हब विकसित कर रही है। भोपाल में एक राष्ट्रीय डाटा सेंटर ऑपरेटर नई क्षमता स्थापित कर रहा है। एक प्रमुख डिजिटल इंजीनियरिंग कंपनी नए आईटी पार्क में साझेदारी कर रही है। अत्याधुनिक सरफेस माउंट टेक्नोलॉजी (SMT) लाइन स्थापित की जा रही है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा। आगामी ‘ईएमसी 2.0’ योजना इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ESDM) इकोसिस्टम के लिए नए क्लस्टर तैयार करेगी।

Friday, August 29, 2025

बहनों के स्नेह और अटूट विश्वास से आज नरेला रक्षाबंधन महोत्सव विश्व का सबसे बड़ा रक्षाबंधन महोत्सव बन चुका है


रक्षाबंधन केवल एक पर्व नहीं, यह हिंदू दर्शन की वह मजबूत कड़ी है जो रक्षा और स्नेह, कर्तव्य और विश्वास, परंपरा और भविष्य इन सभी को एक सूत्र में पिरोती है। भारतवर्ष की आत्मा उनकी यही हिन्दुत्व संस्कृति, तीज और त्यौहार हैं जिससे हर भारतवासी गर्व और आत्मविश्वास से भर उठता है।


धागे से धर्म तक विराट सनातन संस्कृति में रक्षाबंधन को अत्यंत पावन और शक्तिशाली पर्व माना गया है। यह वो क्षण होता है जब 'रक्षा-सूत्र' केवल बंधता नहीं बल्कि संकल्प बन जाता है। यह केवल भाई-बहन के संबंध तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज में धर्म, कर्तव्य और आत्मीयता की रक्षा के संकल्प का भी प्रतीक है।


हमारे शास्त्रों में वर्णित रक्षाबंधन के प्रसंग हमें यह सिखाते हैं कि यह केवल रक्त संबंध का पर्व नहीं बल्कि संरक्षण और उत्तरदायित्व का बोध भी है।


शिशुपाल के वध के बाद जब द्रौपदी ने श्रीकृष्ण की उंगली से बहते रक्त को देखा तो उन्होंने तुरंत ही अपनी साड़ी से एक टुकड़ा फाड़ा और प्रभु श्रीकृष्ण की उंगली पर लपेट दिया। जिससे उंगली का रक्तस्राव रुक गया। उसी समय प्रभु श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को वचन दिया था कि वे समय आने पर इस पट्टी के एक-एक धागे का ऋण जरूर उतारेंगे। इसके बाद प्रभु श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय अनंत साड़ी देकर उनकी मर्यादा और आत्मसम्मान की रक्षा की।


यह प्रसंग इस बात का साक्षी है कि राखी केवल धागा नहीं बल्कि रक्षा, समर्पण और अटूट विश्वास का प्रतीक है। एक दिव्य संकल्प है; सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान की जिम्मेदारी का।


राखी का एक सूक्ष्म धागा जब प्रेम, विश्वास और अपनेपन से जुड़ता है, तो वह केवल भाई-बहन का संबंध नहीं बनाता बल्कि धर्म, कर्तव्य और करुणा का सेतु बन जाता है। और यही सेतु नरेला की पावन भूमि पर पिछले 17 वर्षों से हर रक्षाबंधन पर बनता आ रहा है और मैं बहुत सौभाग्यशाली हूं कि हर वर्ष लाखों बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधती हैं, और मैं गर्व से कहता हूं कि मैं लाखों बहनों का भाई हूं।


यह कोई औपचारिक आयोजन नहीं बल्कि मेरे दिल से जुड़ा हुआ एक आत्मिक संकल्प है। जो हर वर्ष और अधिक भावनात्मक अधिक व्यापक और अधिक ऐतिहासिक बनता जा रहा है।


जब मैंने 17 वर्ष पहले नरेला विधानसभा में रक्षाबंधन के इस आयोजन की शुरुआत की थी। तब मेरा उद्देश्य केवल एक था। हर बहन को यह विश्वास दिलाना कि मैं उनका भाई हूं, उनका रक्षक हूं और उनकी खुशियों के लिए सदैव समर्पित हूं।


आज यह आयोजन विश्व का सबसे बड़ा रक्षाबंधन महोत्सव बन चुका है, जिसमें लाखों की संख्या में बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधती हैं। यह एक मजबूत सामाजिक विश्वास, एक अटूट भावनात्मक संबंध और एक अपार आत्मीयता का प्रतीक बन चुका है।


इस वर्ष भी विश्व का सबसे बड़ा नरेला रक्षाबंधन महोत्सव 11 अगस्त से प्रारंभ होने जा रहा है। जिसमें लाखों की संख्या में बहनें मुझे रक्षासूत्र बांधकर अपना अमूल्य आशीर्वाद प्रदान करेंगी।


जब बहनें मुझे राखी बांधती हैं, तो मैं केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि उनके परिवार के एक सदस्य के रूप में उपस्थित होता हूं। हर राखी मेरे कर्तव्यों की याद दिलाती है, हर मुस्कान मुझे प्रेरणा देती है और हर बहन की आँखों में विश्वास मुझे शक्ति देता है।


यह महोत्सव केवल मेरा नहीं, हर नरेलावासी का पर्व बन चुका है। इसमें सामाजिक समरसता, नारी सशक्तिकरण और सनातन संस्कृति के मूल्यों का अद्भुत समावेश होता है।


रक्षाबंधन के इस पावन पर्व पर मैं केवल धागा नहीं बंधवाता बल्कि हर बहन के जीवन में सुरक्षा, स्वावलंबन, सम्मान और स्वाभिमान की गांठ भी बांधता हूं। यह मेरा संकल्प है कि जब तक मेरा जीवन है तब तक हर बहन को यह विश्वास रहेगा कि उसका भाई हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।


जब बहनें मुझे राखी बांधने आती हैं। कोई छोटी बच्ची है जो पहली बार राखी बांध रही है, कोई वृद्ध मां तुल्य बहन है जो आंखों में आशीर्वाद और विश्वास लिए आती है। यह दृश्य केवल भावुक कर देने वाला नहीं होता, वह अंतर्रात्मा को झकझोरता है साथ ही जीवन में सेवा के संकल्पों की दिशा तय करता है।


रक्षाबंधन मेरे लिए एक जिम्मेदारी है, एक आशीर्वाद है और एक संकल्प है। हर राखी मुझे एक स्मरण कराती है कि मेरा जीवन केवल सेवा के लिए है और बहनों के सम्मान और सुरक्षा के लिए है। बहनों द्वारा बांधा गया रक्षासूत्र मेरे लिए सिर्फ कलाई पर बंधा धागा नहीं बल्कि बहनों के सशक्तिकरण का व्रत है।


आज नरेला विधानसभा की पहचान एक विधानसभा के रुप में नहीं बल्कि नरेला परिवार के रुप में है। यहां हर हिन्दू पर्व केवल परंपरा नहीं बल्कि उत्सव और उल्लास की जीवंत धारा बनकर बहता है। यहां दीपावली की रौशनी सिर्फ घरों को नहीं, दिलों को भी जगमगाती है। होली के रंग केवल चेहरे नहीं, आत्माओं को जोड़ते हैं। रक्षाबंधन के रक्षासूत्र, यहां सिर्फ कलाइयों पर नहीं, समर्पण और संस्कार की डोर बनकर बंधते हैं। मैं गर्व के साथ कहता हूं कि नरेला विधानसभा नहीं नरेला मेरा परिवार है। जहां धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत उदाहरण देखने को मिलता है।


मेरे लिए हर बहन द्रौपदी की छाया है, जिनकी मर्यादा की रक्षा प्रभु श्रीकृष्ण ने की थी। हर बहन माता सीता का प्रतीक है, जिनके सम्मान के लिए प्रभु श्रीराम ने रावण से युद्ध किया और हर बहन भारत माता की बेटी है, जिनके सशक्तिकरण से यह भारत देश समृद्धि होगा।


नरेला परिवार की हर बहन मेरी शक्ति है, मेरी प्रेरणा है और मेरी विजय का प्रतीक है। बहनों मैं यह वचन देता हूं कि जब तक मेरे जीवन में श्वास है, जब तक मेरे कर्म में शक्ति है, तब तक हर बहन की रक्षा, सम्मान, सशक्तिकरण और स्वाभिमान के लिए मैं सदैव समर्पित रहूंगा।


मैं इस पवित्र पर्व पर एक बार फिर समस्त बहनों को नमन करता हूं और वचन देता हूं कि जब तक आपके भाई विश्वास की कलाई धड़कती रहेगी, तब तक हर बहन की मुस्कान मेरी सर्वोच्च प्राथमिकता रहेगी।


बहनों के विश्वास का यह पर्व मेरे जीवन की अक्षय पूंजी है। बहनों आपका स्नेह, आशीर्वाद और अपनापन ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।


 (लेखक श्री विश्वास कैलाश सारंग,  खेल एवं सहकारिता मंत्री है)

Tuesday, July 15, 2025

"मध्यप्रदेश में बाघ की दहाड़ बरकरार"



अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मध्यप्रदेश के लिये विशेष महत्व रखता है। बाघों के अस्तित्व और संरक्षण के लिये प्रदेश में जो कार्य हुए है, उसके परिणाम स्वरूप आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सबसे अधिक बाघ मध्यप्रदेश में है, यह न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि भारत के लिये भी गर्व की बात है। वर्ष 2022 में हुई बाघ गणना में भारत में करीब 3682 बाघ की पुष्टि हुई, जिसमें सर्वाधिक 785 बाघ मध्यप्रदेश में होना पाये गये।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की संवेदनशील पहल के परिणाम स्वरूप बाघों की संख्या में वृद्धि के लिये निरंतर प्रयास हो रहे हैं। बाघ रहवास वाले क्षेत्रों के सक्रिय प्रबंधन के फलस्वरूप बाघों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है। मध्यप्रदेश के कॉरिडोर उत्तर एवं दक्षिण भारत के बाघ रिजर्व से आपस में जुड़े हुए हैं। प्रदेश में बाघों की संख्या बढ़ाने में राष्ट्रीय उद्यानों के बेहतर प्रबंधन की मुख्य भूमिका है। राज्य शासन द्वारा जंगल से लगे गांवों का विस्थापन किया जाकर बहुत बड़ा भूभाग जैविक दवाब से मुक्त कराया गया है। संरक्षित क्षेत्रों से गांव के विस्थापन के फलस्वरूप वन्य प्राणियों के रहवास क्षेत्र का विस्तार हुआ है। कान्हा, पेंच और कूनो पालपुर के कोर क्षेत्र से सभी गांवों को विस्थापित किया जा चुका है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व का 90 प्रतिशत से अधिक कोर क्षेत्र भी जैविक दबाव से मुक्त हो चुका है। विस्थापन के बाद घांस विशेषज्ञों की मदद लेकर स्थानीय प्रजातियों के घास के मैदान विकसित किये गये हैं, जिससे शाकाहारी वन्य प्राणियों के लिये वर्षभर चारा उपलब्ध होता है। संरक्षित क्षेत्रों में रहवास विकास कार्यक्रम चलाया जाकर सक्रिय प्रबंधन से विगत वर्षों में अधिक चीतल की संख्या वाले क्षेत्र से कम संख्या वाले चीतल विहीन क्षेत्रों में सफलता से चीतलों को स्थानांतरित किया गया है। इस पहल से चीतल, जो कि बाघों का मुख्य भोजन है, उनकी संख्या में वृद्धि हुई है और पूरे भूभाग में चीतल की उपस्थिति पहले से अधिक हुई है।


राष्ट्रीय उद्यानों के प्रबंधन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर


मध्यप्रदेश ने टाइगर राज्य का दर्जा हासिल करने के साथ ही राष्ट्रीय उद्यानों और संरक्षित क्षेत्र के प्रभावी प्रबंधन में भी देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को यूनेस्को की विश्व धरोहर की संभावित सूची में शामिल किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा जारी टाइगर रिजर्व के प्रबंधन की प्रभावशीलता मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार पेंच टाइगर रिजर्व ने देश में सर्वोच्च रेंक प्राप्त की है। बांधवगढ़, कान्हा, संजय और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व को सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन वाले रिजर्व माना गया है। इन राष्ट्रीय उद्यानों में अनुपम प्रबंधन योजनाओं और नवाचारी तरीकों को अपनाया गया है।


बाघों के सरंक्षण की पहल


राज्य सरकार बाघों के संरक्षण के लिये कई पहल कर रही है जिनमें वन्य जीव अभयारणों का संरक्षण और प्रबंधन, बाघों की निगरानी के लिये आधुनिक तकनीकों का उपयोग और स्थानीय समुदायों को रोजगार प्रदान करना शामिल है। मध्यप्रदेश में 9 टाइगर रिजर्व हैं, जिसमें (कान्हा किसली, बांधवगढ़, पेंच, पन्ना बुंदेलखंड, सतपुड़ा नर्मदापुरम, संजय दुबरी सीधी, नौरादेही, माधव नेशनल पार्क और डॉ. विष्णु वाकणकर टाइगर रिजर्व (रातापानी) शामिल हैं।मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सबसे अधिक बाघ हैं। यह रिजर्व मध्यप्रदेश का सबसे प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व है।


मध्यप्रदेश के टाइगर रिजर्व में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बढ़ोत्तरी


वन्य जीव पर्यटन में मध्यप्रदेश विशेष आकर्षण का केन्द्र बनकर उभरा है। टाइगर रिजर्व में देशी और विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। प्रदेश के टाइगर रिजर्व में वर्ष 2024-25 में 32 हजार 528, कान्हा टाइगर रिजर्व में 23 हजार 59, पन्ना टाइगर रिजर्व में 15 हजार 201, पेंच टाइगर रिजर्व में 13 हजार 127 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 10 हजार 38 विदेशी पर्यटक की उपस्थिति रही। जबकि वर्ष 2023-24 में विदेशी पर्यटकों की संख्या बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में 25 हजार 894, कान्हा टाइगर रिजर्व में 18 हजार 179, पन्ना टाइगर रिजर्व में 12 हजार 538, पेंच टाइगर रिजर्व में 9 हजार 856 और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में 6 हजार 876 थी।


मध्यपदेश टाइगर रिजर्व में 5 वर्ष में भारतीय पर्यटकों की संख्या 7 लाख 38 हजार 637 और विदेशी पर्यटकों की संख्या 85 हजार 742 रही। इस प्रकार कुल 8 लाख 24 हजार 379 पर्यटकों की संख्या रही। 5 वर्षों में टाइगर रिजर्व की लगभग 61 करोड़ 22 लाख रूपये की आय हुई है।


बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र ‘कान्हा टाइगर रिजर्व’


भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास क्षेत्र घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार कान्हा टाइगर रिजर्व में शाकाहारी वन्य प्राणियों की संख्या देश में सबसे अधिक है, जिनमें चीतल, सांभर, गौर, जंगली सुअर, बार्किंग डियर, नीलगाय और हॉग डियर जैसे शाकाहारी जीवों की बहुतायत है, जो बाघों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। बाघों के निवास के लिये कान्हा रिजर्व में घास के मैदान, जंगल और नदियां शामिल हैं, जो बाघों के लिए संख्या रहवास उपयुक्त हैं। कान्हा टाइगर रिजर्व में सक्रिय आवास प्रबंधन प्रथाओं को लागू किया गया है, जैसे चरागाहों का रखरखाव, जल संसाधन विकास और आक्रामक पौधों को हटाना। कान्हा में गांवों को कोर क्षेत्र से स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हो गया है और वन्यजीवों को स्वतंत्र रूप से घूमने की अनुमति मिलती है। कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की निगरानी के लिए M-STriPES मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाता है और वन कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।


कान्हा टाइगर रिजर्व प्रदेश के मंडला जिले में स्थित है इसका कुल क्षेत्रफल 2074 वर्ग किलोमीटर है जिसमें 917.43 वर्ग किलोमीटर कोर क्षेत्र और 1134 वर्ग किलोमीटर में बफर जोन शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कान्हा टाइगर रिजर्व को बाघों का सर्वश्रेष्ठ आवास घोषित किये जाने पर वन अमले को बधाई दी थी। उन्होंने कहा कि अन्य रिजर्व भी इस दिशा में सकारात्मक पहल करें।


मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण में नवाचार


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिये कई नवाचार किये जा रहे हैं। जीन टेस्टिंग - मध्यप्रदेश में बाघों की जीन टेस्टिंग करने की योजना है, जिससे उनकी सटीक पहचान की जा सकेगी। गुजरात के बनतारा जू और रेस्क्यू सेंटर की तर्ज पर उज्जैन और जबलपुर में रेस्क्यू सेंटर बनाये जा रहे हैं।


ड्रोन स्क्वाड – पन्ना टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण में अत्याधुनिक तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए ‘ड्रोन स्क्वाड’ का संचालन शुरू किया गया है। इससे वन्यजीवों की खोज, उनके बचाव, जंगल में आग का पता लगाने और मानव-पशु संघर्ष को रोकने में मदद मिलेगी।


विस्थापन और रहवास विकास – मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिये 200 गांवों को विस्थापित किया गया है और रहवास विकास कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इससे बाघों के आवास क्षेत्र का विस्तार हुआ है और उनकी संख्या में भी वृद्धि हो रही है। टाइगर रिजर्व के‍ विस्तार के साथ इन नवाचारों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि हुई है और यह देश में सबसे अधिक बाघों वाला राज्य बन गया है।


मध्यप्रदेश में वन्‍य जीव अपराध नियंत्रण की पहल


मध्यप्रदेश में वन्यजीव अपराध नियंत्रण इकाई का गठन किया गया है, जो वन्यजीवों के शिकार और अवैध व्यापार को रोकने के लिए काम करती है। पुलिस और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई से शिकारियों को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल रही है। ग्राम वन प्रबंधन समितियों को वन्यजीव संरक्षण में शामिल किया गया है, जो शिकार को रोकने में मदद करती हैं। वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, जिससे लोगों को वन्यजीवों के महत्व और उनके संरक्षण के बारे में जागरूक हो सके। मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण में आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जैसे कि ड्रोन और कैमरा ट्रैप, जिससे शिकारियों की निगरानी की जा सके। वन विभाग ने वन्यजीव अपराधियों की सूची तैयार की है, जिससे उनके खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सके। मध्यप्रदेश वन विभाग ने अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के साथ सहयोग कर रहा है, जिससे वन्यजीव संरक्षण में मदद मिल सके। इन गतिविधियों के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश में शिकार की घटनाओं में कमी आई है और वन्यजीवों की संख्या में वृद्धि हुई है।


कब हुई बाघ दिवस मनाने की शुरूआत


अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस मनाने का निर्णय 29 जुलाई 2010 में सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) बाघ सम्मेलन में लिया गया था। इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि वर्ष 2022 तक बाघों की आबादी दोगुनी कर देंगे। मध्यप्रदेश बाघों के प्रबंधन में निरंतरता और उत्तरोत्तर सुधार करने में अग्रणी है। बाघ संरक्षण न केवल जैव विविधता के लिये महत्वपूर्ण है बल्कि यह पारिस्थितिकी के संतुलन को भी बनाये रखता है।



 (लेखक श्री के.के. जोशी, जनसंपर्क विभाग)

Friday, June 20, 2025

आपातकाल: स्‍वर्णिम लोकतंत्र का काला अध्‍याय


भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और संविधान लोकतंत्र का रक्षक, क्योंकि संविधान लोकतांत्रिक मूल्यों, मौलिक अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रता की आधारशिला है, किंतु 25 जून 1975 से 31 मार्च 1977 तक का कालखंड ऐसा था, जब देश में सत्ताधारी नेताओं द्वारा इन सभी मूल्यों का गला घोंटा गया। संवैधानिक शब्दावली में इस कालखंड को आपातकाल कहा गया परंतु इतिहास में इसे ‘स्वर्णिम लोकतंत्र के काले अध्याय’ के रूप में जाना जाता है। इस अवधि में तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए न केवल संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया, बल्कि नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को स्थगित करके भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर भी कुठाराघात किया।


1971 में श्रीमती इंदिरा गांधी ने ‘गरीबी हटाओ’ के नारे पर भारी बहुमत से चुनाव अवश्य जीता, लेकिन 1975 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रायबरेली से उनके निर्वाचन अवैध घोषित कर दिया और 6 वर्षों तक चुनाव लड़ने के लिये भी अयोग्य ठहरा दिया। उच्च न्यायालय के इस निर्णय ने श्रीमती इंदिरा गांधी के पद को खतरे में डाल दिया। अपनी सत्ता को बचाने की लाचारी और राजनीतिक वर्चस्व की भूख ने लोकतांत्रिक मूल्यों को ध्वस्त करते हुए श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल लागू कर दिया। आपातकाल का यह निर्णय किसी राष्ट्रीय संकट के कारण नहीं बल्कि श्रीमती गांधी की सत्ता लोलुपता से प्रेरित था। संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आंतरिक अशांति का बहाना बनाकर उन्होंने देश को आपातकाल के अंधकार में धकेल दिया।


संवैधानिक प्रावधानों के तहत देश में आपातकाल मंत्रिमंडल की अनुशंसा पर राष्ट्रपति द्वारा लागू किया जाना चाहिए, परंतु श्रीमती गांधी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने 26 जून 1975 को सुबह 6:00 केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर मंत्रियों को बताया कि मध्य रात्रि के बाद से देश में आपातकाल लगा दिया गया है। कुल मिलाकर देश में आपातकाल लागू करने के बाद और देश को यह सूचना देने से पहले श्रीमती गांधी ने मंत्रिमंडल की महज औपचारिक सहमति प्राप्त की, जो उनकी तानाशाही को दर्शाता है। आपातकाल लागू करते ही इंदिरा गांधी की तानाशाही शुरू हो गई। उन्होंने देश में नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों को स्थगित कर दिया। श्रीमती गांधी द्वारा राष्‍ट्रवादी विचारधारा को कुचलने का कार्य किया। लोकतंत्र को बचाने के लिये प्रतिरोध करने वालों के विरूद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किये गये। जनसंघ और अन्य विपक्षी दलों से जुड़े नेताओं को गिरफ्तार कर ‘मीसा’ अर्थात आंतरिक सुरक्षा कानून के तहत जेल में डाल दिया गया जयप्रकाश नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेई और लालकृष्ण आडवाणी जैसे अनेक वरिष्ठ नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया। एक अनुमान के मुताबिक बिना सुनवाई 

के लगभग 01 लाख 40 हजार से अधिक  लोगों को जेल में बंद कर दिया गया। लोकतंत्र की सबसे जरूरी विशेषता ‘वैकल्पिक विचार’ को श्रीमती इंदिरा गांधी ने राजद्रोह में बदल दिया।


आपातकाल में इंदिरा गांधी ने न्यायपालिका जो लोकतंत्र की रक्षा की अंतिम संस्था है, उसे भी झुकने पर मजबूर कर दिया। न्यायपालिका की स्वायत्तता को छीनने का प्रयास किया गया। सत्ता की आलोचना करने वाले अखबारों को सेंसर कर दिया गया। अनेक समाचार पत्रों के छपने पर रोक लगा दी गई। यह प्रेस की स्वतंत्रता का सबसे भयावह क्षण था। संजय गांधी के मार्गदर्शन में चलाए जाने वाला ‘नसबंदी अभियान’ सरकारी आतंक का प्रतीक बन गया। व्यक्तिगत सत्ता स्थायित्व के लिए संविधान में प्रजातंत्र विरोधी संशोधन किए गए। न्यायपालिका की शक्ति को सीमित करने की कोशिश की गई। यह वास्तव में भारत के लोकतांत्रिक संतुलन को बिगाड़ने की एक बड़ी साजिश थी । आपातकाल के दौरान कांग्रेस ने ‘इंदिरा इज इंण्डिया एण्‍ड इंण्डिया इज इंदिरा’ जैसे नारों को प्रसारित किया जो इंदिरा गांधी की निरंकुशता, तानाशाही और संविधान विरोधी मानसिकता को दर्शाते हैं। आपातकाल के दौरान प्रसिद्ध कवि जी.एस. शिवरूद्रप्पा ने ‘इस देश में’ नामक एक कविता लिखी-


" इस देश में

वीर पूजा ,परिवार पूजा

खत्म होनी चाहिए,

लेकिन मेरी कुलदेवी की तरफ कोई आंख न उठाए,

इसदेश में

हर एक को अपना मुंह बंद रखना चाहिए

लेकिन उन्हें मेरे शब्द सुनने के लिए

अपने कान खुले रखना चाहिए " 


यह कविता देश में इंदिरा गांधी की तानाशाही और लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक मूल्यों पर किए गए वज्रपात को प्रदर्शित करती है।


आजकल कुछ विपक्षी नेता संविधान की प्रतियां हाथों में लेकर संसद से सड़कों तक ‘संविधान खतरे में है’ और ‘लोकतंत्र खतरे में है’ के नारे लगा रहे हैं। राजनीतिक स्वार्थ के लिए संविधान और लोकतंत्र को खतरे में बताने वाले इन नेताओं को थोड़ा अतीत में झांकना चाहिए। राहुल गांधी को पीछे जाकर अपनी दादी इंदिरा के काले कारनामों को देखना चाहिए, कि किस तरह उनकी सत्ता की लालसा ने देश में लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की हत्या की थी।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज देश विकास और प्रगति के नए आयाम को स्पर्श कर रहा है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। समावेशी विकास में लोकतंत्र की पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक विकास को प्रवाहित किया है। लोकतांत्रिक मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मोदी सरकार द्वारा जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला और जनधन जैसी योजनाओं को धरातल पर लागू किया गया है। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए संवैधानिक प्रावधानों को स्थगित कर दिया था, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने संवैधानिक मूल्यों और प्रावधानों के अनुक्रम में धारा 370 को हटाने, जीएसटी लागू करने जैसे राष्ट्रीय हित के कार्यों को मूल रूप प्रदान किया है। आपातकाल लोकतांत्रिक इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है, जो हमें चेतावनी देता है, कि सत्ता का केंद्रीकरण किस हद तक लोक स्वतंत्रता को कुचल सकता है। 


आपातकाल इस बात की चेतावनी है, कि जब सत्ता की भूख विवेक पर हावी हो जाती है, तब लोकतंत्र खोखला हो जाता है। इंदिरा गांधी द्वारा लागू किया गया आपातकाल उनके राजनीतिक स्वार्थ और आत्ममुग्धता का प्रतीक था। वह एक समय था जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने देश की आत्मा को कुचल कर सत्ता की कुर्सी को बचाया था। इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू करके देश की जनता पर जो अत्याचार किया, उसका उत्तर जनता ने 1977 के चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से बाहर करके दिया। जिससे यह स्पष्ट है कि आपातकाल भारत के स्‍वर्णिम लोकतंत्र में न केवल एक काला अध्‍याय है, बल्कि सत्‍ता के मद में चूर श्रीमती इंदिरा गांधी की तानाशाही का भी प्रतीक है। 


 (लेखक श्री धर्मेन्‍द्र सिंह लोधी, संस्‍कृति, पर्यटन, धार्मिक न्‍यास एवं धर्मस्‍व राज्‍यमंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) है)

Monday, June 2, 2025

CARA वेबसाइट से घर बैठे करें बच्चा गोद लेने के लिए आवेदन

कई दंपती ऐसे होते हैं जिनकी संतान नहीं होती है। वे इसके लिए बच्चा गोद लेना चाहते हैं। बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया आप घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से कर सकते हैं। अब बच्चा गोद लेने की प्रक्रिया पहले से काफी आसान और पारदर्शी हो गई है। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन कार्य करने वाला केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (कारा) देश में दत्तक ग्रहरण की पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करता है। कारा सरकारी एजेंसी है जो यह सुनिश्चित करती है कि बच्चे को गोद लेने की पूरी प्रक्रिया कानूनी, पारदर्शी और बच्चे के हित में हो। 


कौन कर सकता है गोद लेने के लिए आवेदन: किसी भी धर्म, जाति या समुदाय का व्यक्ति बच्चा गोद ले सकता है, यदि वह मानसिक और आर्थिक रूप से सक्षम है। इसके लिए विवाहित जोड़े की शादी को कम से कम दो वर्ष हो चुके हों। दोनों पति-पत्नी की सहमति आवश्यक है। गोद लेने वाले की उम्र और बच्चे की उम्र में 25 वर्ष का अंतर हो। अविवाहित व्यक्ति भी बच्चा गोद ले सकता है, लेकिन समान लिंग के दंपतियों के लिए फिलहाल यह अनुमति नहीं है। 


ऐसे करें प्रक्रिया पूरी: गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। इसके लिए सबसे पहले कारा वेबसाइट cara.wcd.gov.in पर जाकर चाइल्ड एडाप्शन रिसोर्स इंफार्मेशन एंड गाइडेंस सिस्टम (केरिंग) पोर्टल में लागिन करें और प्रोस्पेक्टिव एडाप्टिव पेरेंट्स रजिस्ट्रेशन पर क्लिक करें। इस पर पहचान प्रमाण, आय प्रमाण, स्वास्थ्य रिपोर्ट, फोटो आदि स्कैन कर अपलोड करें। आवेदन के बाद संबंधित स्पेशलाइज्ड अडाप्शन एजेंसी आपके घर आकर आपकी स्थिति और वातावरण का मूल्यांकन करती है। यह रिपोर्ट प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। आपकी रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद पोर्टल पर तीन बच्चों की जानकारी दिखाई जाती है। 


अभिभावक के नाम से बन सकते हैं दस्तावेज: अदालत से एडाप्शन आर्डर मिलने के बाद गोद लिए गए बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज नए अभिभावकों के नाम से बनवाए जा सकते है। एजेंसी बच्चे की शुरूआती देखभाल के लिए कुछ समय तक परामर्श व निगरानी भी करती है।  

Friday, May 9, 2025

मां अहिल्या से लाड़ली बहनों तक... मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण की स्वर्णिम परंपरा


भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरा पर यदि कोई शहर मां अहिल्या बाई होलकर जी की करुणा, नीति एवं लोक कल्याण की प्रेरणा से ओतप्रोत है, तो वह है अपना इंदौर। यह वही पावन भूमि है, जहां मां अहिल्या ने धर्म, न्याय तथा सेवा का ऐसा स्वर्णिम अध्याय रचा, जो आज भी शासन, प्रशासन और समाज के लिए पथप्रदर्शक है। 31 मई 2025 को यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कर कमलों से मेट्रो ट्रेन की शुरुआत इंदौर की आत्मा को आधुनिकता के साथ जोड़ने की संकल्पना है।


यह कितना सुंदर संयोग है कि इसी दिन रानी कमलापति की नगरी भोपाल के जंबूरी मैदान में 'महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन' का आयोजन भी हो रहा है, जिसे प्रधानमंत्री जी स्वयं संबोधित करेंगे। वहीं इस ऐतिहासिक अवसर पर मां शारदा की पावन भूमि सतना तथा मां पीताम्बरा की धरा दतिया को हवाई अड्डे की सौगात मिलेगी। यह सभी कार्यक्रम एक ही धागे से बंधे हैं...यानी विकास और विश्वास, गति और गौरव, परिवहन और परिवर्तन।


इंदौर में टेम्पो से लेकर अब मेट्रो तक की विकास यात्रा अद्भुत


इंदौर की विकास यात्रा टेम्पो से लेकर आज मेट्रो ट्रेन तक आ पहुंची है। सब कुछ कितनी तेजी से गुजर गया और अपना इंदौर अब मेट्रो शहर बन गया। शहर में मेट्रो की शुरुआत एक सुगम परिवहन सुविधा के साथ संपूर्ण जीवनशैली का परिवर्तन है। यह परियोजना इंदौर की स्वच्छता, अनुशासन और नवाचार की पहचान को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। मेट्रो का प्रथम चरण यातायात की सुगमता, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह परियोजना मध्यप्रदेश को 'स्मार्ट स्टेट' बनाने की दिशा में भी सशक्त कदम है।


जैसा कि कहा गया है...


"शास्त्रेषु नगरस्य लक्ष्मणानि सप्त- स्वच्छता, जल व्यवस्था, परिवहन, नागरिक अनुशासन, पर्यावरण, सुरक्षा योजना एवं सांस्कृतिक चेतना।" इंदौर मेट्रो इस सप्तम स्तंभ को और सशक्त करेगी। इंदौरवासियों की आकांक्षाओं को पंख देगी। यह 'न्यू अर्बन इंडिया' की जीवंत मिसाल है, जो स्वच्छता के सिरमौर इंदौर को वैश्विक नगरीय गौरव के शिखर पर स्थापित करेगी।


नारी शक्ति अर्धांगिनी नहीं, समाज के उत्थान की अधिष्ठात्री


हमारी डबल इंजन की सरकार में महिला सशक्तिकरण केवल नीतियों का विषय नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है। मां अहिल्या बाई होलकर इसकी प्रतीक हैं। उन्होंने राजसिंहासन पर बैठकर धर्म, न्याय तथा लोककल्याण की ऐसी मिसाल कायम की, जो आज भी प्रासंगिक है। उनके द्वारा निर्मित सैकड़ों घाट, समाज के वंचित वर्गों के लिए अन्न क्षेत्र और खुले दरबार न केवल उनके शासन को 'सुराज्य' बनाते थे, बल्कि यह भी दर्शाते थे कि नारी शक्ति अर्धांगिनी नहीं, समाज के उत्थान की अधिष्ठात्री है। मां अहिल्या का जीवन समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए समर्पित रहा है। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व अनमोल निधि है। उनके कालजयी विचार हर युग में 'बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय' का संदेश देते हैं। आज हमारी सरकार इसी ध्येय के साथ जनकल्याण के पथ पर अग्रसर है। प्रदेश में लागू लाड़ली बहना योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना और स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक सशक्तिकरण जैसे कार्यक्रम उसी परंपरा का आधुनिक स्वरूप हैं। इसी क्रम में मध्यप्रदेश में शहरी क्षेत्र की बहनों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए दीनदयाल जन आजीविका योजना संचालित की जा रही है।


जैसा कि संस्कृत में कहा गया है कि- "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता:"


जहां नारी का सम्मान होता है, वहां समृद्धि और शांति का वास होता है। यह हमारी नीति और दृष्टि का मूलमंत्र है। संपूर्ण विश्व ने बहनों के सिंदूर की ताकत अभी हाल ही में देखी है। अब भोपाल में आयोजित होने जा रहा महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन भारत की नारी मातृशक्ति को नमन और उनके सामर्थ्य को सशक्त करने का महायज्ञ है।


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लागू की गई उज्ज्वला योजना, जनधन खाता, मातृत्व वंदना योजना और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसे कार्यक्रमों ने करोड़ों बेटियों, बहनों के जीवन को नई दिशा दी है। मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, शिक्षा, रोजगार और सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अभूतपूर्व कार्य हो रहे हैं। यह मां अहिल्या के आदर्शों, न्याय, करुणा एवं शक्ति के संतुलन का साकार रूप है।


इंदौर में स्वच्छता, संस्कृति और सशक्तिकरण का संगम


मैंने राजनीति में जो सीखा, वह मां अहिल्या की भूमि से सीखा। एक सार्वजनिक सेवक के रूप में, जब विकास की बात आती है तो मेरे मन में केवल एक ही ध्येय होता है...हमारा देश, हमारा प्रदेश, हमारी संस्कृति और हमारा गौरव। मुझे संतोष है कि अपना इंदौर आज सबसे स्वच्छ शहर होने के साथ नारी सशक्तिकरण का प्रतीक है। इसी क्रम में हमने तय किया है कि इंदौर मेट्रो के पहले स्टेशन का नामकरण मां अहिल्या बाई के नाम पर किया जाएगा। अब जब 31 मई को इंदौर मेट्रो की पहली ट्रेन दौड़ेगी और भोपाल में लाखों बहनें प्रधानमंत्री जी के प्रेरक विचारों को सुनेंगी, तब यह केवल आयोजन नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के नवयुग का शंखनाद होगा। यह मां अहिल्या के आदर्शों को आधुनिकता के साथ जोड़ने का संकल्प होगा।


मैं इंदौर और मध्यप्रदेश की जनता को इस ऐतिहासिक अवसर की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। यह गर्व का क्षण है कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में हम मध्यप्रदेश की धरा को विकास और सम्मान के नए शिखर पर ले जा रहे हैं।



 (लेखक श्री कैलाश विजयवर्गीय, मध्यप्रदेश सरकार में नगरीय विकास एवं आवास तथा संसदीय कार्य मंत्री हैं।)

Sunday, April 6, 2025

"सशक्त नारी, सशक्त समाज, सशक्त भारत"


भारतीय संस्कृति में नारी को सदा ही शक्ति, विद्या और सृजन का प्रतीक माना गया है। भारतीय परंपरा का मूल "यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवताः" की अवधारणा है। हमारी प्राचीन सभ्यता में गार्गी, मैत्रेयी से रानी चैनम्मा, पुण्यश्लोका रानी अहिल्याबाई होल्कर और वीरांगना लक्ष्मीबाई जैसी नारियों ने न केवल समाज को दिशा दी, बल्कि अपने समय में नेतृत्व का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।


भारतीय संस्कृति में महिलाओं को हमेशा सम्मान और उच्च स्थान दिया गया है। वैदिक काल में वेदाध्ययन, राजनीति और धर्मशास्त्र में महिलाओं की भागीदारी देखी गई। देवी सरस्वती, देवी लक्ष्मी और माँ दुर्गा के रूप में नारी को विद्या, समृद्धि और शक्ति का स्वरूप माना गया है। इतिहास गवाह है कि महिलाओं ने प्रत्येक क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।


आज की महिलाएँ सिर्फ घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हर क्षेत्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। शिक्षा, विज्ञान, राजनीति, खेल और व्यापार में भारतीय महिलाओं ने अपनी सशक्त पहचान बनाई है। कल्पना चावला, पीटी ऊषा, पी.वी. सिंधु, किरण मजूमदार शॉ, फाल्गुनी नायर, साइना नेहवाल, एमसी मैरीकॉम और नंदिनी हरिनाथ जैसी महिलाओं ने अपने-अपने क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों हासिल की हैं।


मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़कर काम किया जा रहा है। राज्य सरकार महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ चला रही है। इससे वे आत्मनिर्भर बन रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना और महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजनाएँ प्रदेश की महिलाओं को सशक्त बना रही हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक योजनाएँ शुरू की गईं। इनसे समाज में क्रांतिकारी बदलाव आया। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना. मातृत्व वंदना योजना, सुकन्या समृद्धि योजना, महिला हेल्पलाइन एवं स्टैंड-अप इंडिया जैसी योजनाएँ महिलाओं के जीवन को बेहतर बना रही हैं।


इसके अलावा, केन्द्र सरकार ने महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को भी बढ़ावा दिया है। हाल ही में संसद में महिला आरक्षण विधेयक पास किया गया। इससे अब लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित होंगी। यह एक ऐतिहासिक कदम है जो महिला नेतृत्व को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा।


महिलाएँ आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं। सरकार की नीतियों, योजनाओं और समाज के बदलते दृष्टिकोण ने महिलाओं के लिए नए अवसरों के द्वार खोले हैं। भारतीय संस्कृति में सदैव नारी को सम्मान मिला है। वर्तमान में केन्द्र सरकार की नीतियों से महिलाओं को और अधिक सशक्त बनने का अवसर मिल रहा है। अब समय आ गया है कि हम सभी मिलकर महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प लें ताकि वे आत्मनिर्भर और सशक्त बन सकें।


 (लेखिका श्रीमती कृष्णा गौर, मध्यप्रदेश सरकार में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं।)

Tuesday, March 25, 2025

संघर्ष से सशक्त नेतृत्व की ओर अग्रसर जनजातीय महिलाएं


अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि यह अवसर है उन उपलब्धियों को सराहने का, जो महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में हासिल हुई हैं। साथ ही, यह दिन हमें यह सोचने का अवसर भी प्रदान करता है कि आगे का रास्ता क्या होना चाहिए। भारत जैसे देश में, जहाँ नारी को शक्ति और सहनशीलता का प्रतीक माना जाता है, वहाँ जनजातीय महिलाओं के सशक्तिकरण के लिये प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है।


जनजातीय महिलाएँ अपनी संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान की प्रतीक रही हैं। सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों के कारण जनजातीय वर्ग की महिलायें लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहीं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार इस दूरी को समाप्त कर रही है। उद्देश्य यह नहीं कि वे केवल लाभार्थी बनें, बल्कि वे समाज की निर्णायक शक्ति बनकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करें।


सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम


सरकार की सोच यह नहीं कि महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ मिले, बल्कि वे अपने निर्णय स्वयं ले सकें, अपने व्यवसाय और कार्यक्षेत्र में मजबूती से खड़ी हो सकें। प्रधानमंत्री वन धन योजना के तहत जनजातीय महिलाओं को उनके द्वारा संग्रहीत वन उपज का सही मूल्य दिलाने के लिए सशक्त तंत्र विकसित किया गया है। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी है, बल्कि वे अब स्वयं का व्यवसाय भी कर रही हैं।


बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना ने बालिका शिक्षा को प्राथमिकता दी है, जिससे जनजातीय और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों के स्कूल छोड़ने की दर में उल्लेखनीय गिरावट आई है। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता देकर उनके पोषण और स्वास्थ्य की सुरक्षा कर रही है। स्टैंड-अप इंडिया योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं को स्व-रोजगार हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे खुद के व्यवसाय की स्थापना कर सकें। मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में भी आगे बढ़कर कार्य कर रही है। पीछे नहीं है।


मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में राज्य सरकार महिलाओं को प्रत्यक्ष आर्थिक सहयोग प्रदान कर रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार हुआ है। मुख्यमंत्री आदिवासी महिला उद्यमिता योजना ने जनजातीय महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हर घर जल योजना ने जल संकट से जूझ रही ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए राहत प्रदान की है, जिससे उनका दैनिक जीवन सरल हुआ है।


पेसा अधिनियम ने ग्राम सभाओं में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती प्रदान की है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति अधिक सजग और जागरूक हो रही हैं। अब वे अपनी ग्राम सभाओं में न केवल सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं, बल्कि अपने समुदाय की नीतियाँ तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही हैं।


संघर्ष से सशक्त नेतृत्व तक का सफर


मैं स्वयं एक जनजातीय महिला हूँ। जीवन में संघर्ष मेरे लिए नया नहीं है। बचपन में परिवार की मदद के लिए ईंट-भट्टों पर मजदूरी से लेकर सरपंच, जिला पंचायत अध्यक्ष, राज्यसभा सदस्य और अब मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने तक का सफर आसान नहीं था। लेकिन मेरी पार्टी का संगठनात्मक सशक्तिकरण और मजबूत नेतृत्व ही है, जिसने मुझे और हमारे समाज की लाखों महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दिए।


मेरी पार्टी ने सदैव जनजातीय समाज को प्राथमिकता दी है। जब देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति के रूप में श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मिलीं, तो यह केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे जनजातीय समाज की उपलब्धि थी। यह इस बात का प्रमाण है कि अगर महिलाओं को सही अवसर और संसाधन मिलें, तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं।


महिला सशक्तिकरण कोई एक दिन की प्रक्रिया नहीं है, यह एक निरंतर चलने वाली यात्रा है। यह केवल व्यक्तिगत विकास तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज और राष्ट्र की उन्नति का आधार है। महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि नीति-निर्माण और निर्णय लेने में भागीदार बनाना ही सही मायनों में सशक्तिकरण है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के साथ समाज में उन्हें सम्मानजनक स्थान दिलाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।


आज, जब दुनिया नारी शक्ति का सम्मान कर रही है, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समाज के सबसे वंचित वर्ग- जनजातीय और अनुसूचित जाति की महिलाएँ-विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।


मेरा सभी माताओं, बहनों और बेटियों से आग्रह है कि वे सरकार की योजनाओं का पूरा लाभ उठाएँ, आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाएँ और अपने सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ें। जब महिलाएँ आगे बढ़ेंगी, तो समाज और देश भी नई ऊँचाइयों को छुएगा।


 (लेखिका श्रीमती संपतिया उइके, मध्यप्रदेश सरकार में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री हैं।)

Sunday, January 12, 2025

खिलाड़ी और खेल मैदानों में आगे बढ़ते युवा


मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता में युवा वर्ग सदा ही रहा है। सरकार युवाओं को खेल खिलाड़ी और मैदान के जरिए भी अग्रसर बनाने का काम कर रही है। राज्य सरकार ने खेल के माध्यम से युवाओं को सम्मान के साथ नौकरी देने का भी काम किया है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 दिसंबर 2024 को मध्यप्रदेश की खेल प्रतिभाओं का सम्मान कर खिलाड़ियों को 25.389 करोड़ की राशि वितरित की। इसके पहले 2 अक्टूबर 2024 को 18 विक्रम अवार्ड प्राप्त खिलाड़ियों को शासकीय सेवा के नियुक्ति पत्र प्रदान किये गये।


मध्यप्रदेश सरकार विभिन्न आयामों पर काम कर रही है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन के लिए आवश्यक संसाधन एवं अधोसंरचना उपलब्ध करा रही है। इसी का परिणाम है कि 2 जनवरी 2025 को मध्यप्रदेश के पैरालंपिक खिलाड़ी श्री कपिल परमार और सुश्री रुबीना फ्रांसिस को अर्जुन अवार्ड देने की घोषणा भारत सरकार ने की। दोनों खिलाड़ियों ने प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाया है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा 17 जनवरी 2025 को राष्ट्रपति भवन में दोनों खिलाड़ियों को खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कार अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया जाएगा।


युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए सभी शासकीय विभागों में लगभग एक लाख पदों पर भर्ती की जा रही है। आगामी 5 वर्ष में ढाई लाख सरकारी नौकरियाँ उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। पदों की भर्ती के लिये हर साल सरकारी परीक्षा कैलेण्डर जारी करने का निर्णय लिया गया है। अभी तक सरकारी नौकरियों के लिये चयनित लगभग 11 हजार अभ्यर्थियों को नियुक्ति-पत्र सौंपे गये हैं।


भारत सरकार के पीएलएफ सर्वे में मध्यप्रदेश ने सबसे कम बेरोजगारी दर दर्ज की है। स्टार्ट-अप को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में सहभागिता के लिये 50 हजार से लेकर डेढ़ लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। राज्य स्तरीय रोजगार दिवस के अवसर पर रिकॉर्ड 7 लाख युवाओं को 5 हजार करोड़ का स्व-रोजगार ऋण वितरित किया गया। मुख्यमंत्री सीखो-कमाओ योजना के तहत वर्ष 2024 में लगभग 20 हजार चयनितों को करीब 41 करोड़ रुपये स्टायपेंड वितरित किया गया। प्रदेश में 600 से अधिक रोजगार मेले हुए, इसमें 61 हजार से ज्यादा आवेदकों को निजी क्षेत्र में नियुक्ति-पत्र प्रदाय किये गये। प्रतियोगी परीक्षाओं के शुल्क का भुगतान भी राज्य सरकार द्वारा किये जाने का निर्णय लिया गया है।


राज्य सरकार ने हर विकासखण्ड में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स निर्माण का निर्णय लिया। भोपाल में 985 करोड़ रुपये से अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का निर्माण प्रगतिरत है। वर्तमान में 111 स्टेडियम/खेल प्रशिक्षण केन्द्र निर्मित हैं, जबकि 56 खेल स्टेडियम/प्रशिक्षण केन्द्र निर्माणाधीन हैं। सरकार ने खेल को शिक्षा से जोड़ते हुए सतना में स्पोर्ट्स कॉलेज और सिंथेटिक ट्रेक बनाने का निर्णय लिया है। साथ ही वन डिस्ट्रिक्ट-वन स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के अंतर्गत प्रदेश के सभी जिलों में खेल स्टेडियम बनाने का निर्णय भी राज्य शासन द्वारा लिया गया है। यही नहीं पुलिस में स्पोर्ट्स कोटा निर्धारित कर प्रतिवर्ष 10 सब इंस्पेक्टर एवं 50 कांस्टेबल को नियुक्ति देने का कार्य भी किया जा रहा है।


प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में कृषि विषय एवं विश्वविद्यालयों में पायलेट ट्रेनिंग कोर्स शुरू होगा। उज्जैन के इंजीनियरिंग कॉलेज में आईआईटी का सेटेलाइट कैम्पस शुरू किया जा रहा है। भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, इंदौर, उज्जैन और रीवा के 6 विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन केन्द्रों की स्थापना का निर्णय भी राज्य सरकार द्वारा लिया गया है। कौशल विकास एवं एमर्जिंग ट्रेड्स के दृष्टिगत एआई, मशीन लर्निंग, कोडिंग आधारित शिक्षा उपलब्ध करायी जायेगी। वर्तमान में कुल 268 शासकीय आईटीआई संचालित हैं। इस वर्ष 22 नये आईटीआई प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसी के साथ 5280 अतिरिक्त सीट की वृद्धि होगी। देवास, छिंदवाड़ा एवं धार को ग्रीन स्किलिंग आईटीआई में विकसित कर सोलर टेक्नीशियन एवं इलेक्ट्रिक व्हीकल, मैकेनिक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने का भी निर्णय लिया गया है।


राज्य सरकार का उद्देश्य खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा खेल अकादमी के माध्यम से चिन्हित, प्रतिभावान खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का खेल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाना है। प्रदेश में अब तक 18 खेलों की 11 अकादमियाँ स्थापित की गयी हैं। खेल अधोसंरचना निर्माण/विकास तथा उपलब्ध अधोसंरचना के संचालन एवं संधारण में अब तक विभिन्न 4 श्रेणियों के 107 खेल अधोसंरचना परिसर तैयार हैं। राज्य सरकार द्वारा परफार्मेंस, स्पोर्ट्स एवं कम्युनिटी स्पोर्ट्स पर भी कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के खिलाड़ी शूटिंग, घुड़सवारी, हॉकी एवं वॉटर स्पोर्ट्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। इन खेलों के खिलाड़ियों को अंतर्राष्ट्रीय एक्सपोजर दिया जायेगा। खेलों की मूलभूत सुविधा युवाओं को अपने आसपास ही उपलब्ध हो, इसके लिये कम्युनिटी स्पोर्ट्स को बढ़ावा दिये जाने का काम किया जा रहा है। वर्तमान में खिलाड़ियों के प्रदर्शन में स्पोर्ट्स साइंस एवं फिटनेस का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में स्पोर्ट्स साइंस को बढ़ावा दिया जा रहा है। नाथू बरखेड़ा भोपाल में अंतर्राष्ट्रीय स्तर के स्पोर्ट्स साइंस सेंटर की स्थापना भी की जा रही है। शासन के सीमित वित्तीय संसाधनों को दृष्टिगत रखते हुए खेल अधोसंरचना का निर्माण एवं उपलब्ध खेल अधोसंरचना को पीपीपी मॉडल से किया जा रहा है।


नवाचार की दिशा में प्रत्येक जिले में कोई न कोई खेल लोकप्रिय होता है। उस खेल को केन्द्रित कर सभी आवश्यक संसाधन संबंधित जिले में उपलब्ध कराने पर भी काम किया जा रहा है। युवाओं को फिटनेस के प्रति जागरूक करने के लिये प्रत्येक विधानसभा में आउटडोर जिम स्थापित करने की भी योजना है। प्रत्येक जिले में स्कूल चिन्हित कर वहाँ स्पोर्ट्स के आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराये जायेंगे। प्रत्येक खेल अधोसंरचना के उपयोग के लिये “पे एण्ड प्ले’’ योजना का क्रियान्वयन सहकारिता विभाग के तहत खेल समितियों का गठन कर किया जायेगा। प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने तथा प्रशिक्षण स्किल को अद्यतन करने के लिये डेव्हलपमेंट प्रोग्राम संचालित किया जायेगा। युवाओं की अभिरुचि को दृष्टिगत रखते हुए ई-स्पोर्ट्स अकादमी स्थापित करने का भी लक्ष्य है। युवाओं को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से जोड़कर उन्हें सशक्त और मजबूत बनाने के उद्देश्य से साल भर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं, जिससे उनके बौद्धिक एवं शारीरिक स्तर में वृद्धि हो सके।


(लेखक श्री दुर्गेश रायकवार (जनसम्पर्क विभाग में उप संचालक है।))

Sunday, December 8, 2024

मोदी के विकसित भारत की उड़ान भरता मोहन का मध्यप्रदेश


प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत का सपना साकार हो रहा है। इस सपने को साकार करने में स्वास्थ्य क्षेत्र की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक स्वस्थ राष्ट्र ही समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र बन सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार, तकनीकी विकास और गुणवत्ता सुधार के प्रति प्रतिबद्धता के साथ भारत वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी दिशा में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में राज्य ने लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है।


जहां एक ओर प्रदेश में वर्ष- 2003 तक सिर्फ 5 शासकीय मेडिकल कॉलेज थे। अब 17 मेडिकल कॉलेज संचालित है। हाल ही में 3 नये मेडिकल कॉलेज नीमच, मंदसौर, सिवनी का शुभारंभ माननीय प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर कमलों से संपन्न हुआ है। आगामी 2 वर्षों 8 शासकीय और 12 मेडिकल कॉलेज PPP मोड पर प्रारंभ करने की योजना प्रक्रियाधीन है। राज्य सरकार प्रत्येक जिले के लिए एक मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हम निरंतर प्रयास कर रहे हैं।


पिछले एक वर्ष में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की दूरदर्शिता और दृढ़-संकल्प ने प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में कई ऐतिहासिक पहल की हैं। उज्जैन में प्रदेश की पहली मेडिसिटी और एक नए चिकित्सा महाविद्यालय के लिए 592.30 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है। 13 शासकीय नर्सिंग महाविद्यालयों की स्थापना के लिए स्वीकृति दी है। स्वास्थ्य संस्थानों के लिए 46,491 नए पद सृजित किए गए हैं। यह कदम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा। प्रदेश में दो वर्षों से लंबित लगभग एक लाख नर्सिंग छात्र-छात्राओं की परीक्षा इस वर्ष आयोजित की गई, जिससे उनके भविष्य को लेकर उपजे संदेह का निराकरण हुआ है।


प्रदेश के हर नागरिक को उत्तम स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना मुख्यमंत्री की प्राथमिकता रही है। जहां एक ओर प्रधानमंत्री जी ने आयुष्मान योजना का विस्तार करते हुए 70 वर्ष से अधिक के नागरिकों को योजना में लाभ की पात्रता प्रदान की है, वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री जी ने "पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा" के माध्यम से राज्य के गंभीर रोगियों और दुर्घटना पीड़ितों को त्वरित और उच्च चिकित्सा सहायता प्रदान की है। हेली एंबुलेंस और फिक्स्ड विंग फ्लाइंग एंबुलेंस की सेवाएं राज्य के भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को मजबूत कर रही हैं।


मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत निरामयम योजना के अंतर्गत 4.02 करोड़ कार्ड जारी किए गए हैं। लगभग 5599 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्र भी खोले गए हैं, जिससे न्यूनतम दर पर मरीजों को दवा उपलब्ध हो सकेगी।


सरकार ने गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के बाल चिकित्सा विभाग में अपना पहला राज्य नवजात और बाल चिकित्सा संसाधन केंद्र स्थापित किया। डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी का उपयोग बढ़ाया गया है। पीएम-जनमन अभियान के तहत 74 मोबाइल मेडिकल यूनिट्स संचालित की गईं, जो दूर-दराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही हैं।


इसी क्रम में देश में पहली बार किसी शासकीय चिकित्सालय में ब्लड कैंसर के मरीजों के लिए CAR- T-Cell Therapy की सुविधा इंदौर के महाराजा यशवंतराव होल्कर चिकित्सा महाविद्यालय में उपलब्ध करवाई है। तो वहीं हृदय रोग की आधुनिक उपचार सेवा हेतु भोपाल के जय प्रकाश जिला चिकित्सालय में 30 बिस्तरीय कार्डियक कैथ लैब की स्थापना की जा रही है।


यह भी महत्वपूर्ण पहल है कि एम.आर.आई. सेवाओं को व्यवस्थित करते हुए प्रदेश के 5 संभागीय मुख्यालयों के जिला चिकित्सालयों (भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर एवं उज्जैन) में एम.आर.आई. मशीनों की स्थापना की जा रही है।


मध्यप्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग में दूसरे स्थान पर है और इसी रोग से ग्रसित वयस्क मरीजों को गंभीर संक्रमणों से बचाने के लिए टीकाकरण की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। गर्भवती महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता रखते हुए राज्य सरकार ने जननी शिशु सुरक्षा योजना के अंतर्गत उन जिलों में जहाँ गर्भवती महिलाओं के लिए सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध नहीं थी, अब निजी सोनोग्राफी सेंटरों के माध्यम से निःशुल्क सोनोग्राफी प्रदान की है।


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के नेतृत्व में लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तकनीक और नवाचार को अपनाते हुए प्रदेश को नई दिशा दी है। उनकी दूरदर्शिता और प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं न केवल तकनीकी रूप से उन्नत हुई हैं, बल्कि हर नागरिक तक पहुंचने में भी सक्षम हो रही हैं। प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के लक्ष्य के साथ कदम से कदम मिलाते हुए, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए जो कार्य किए हैं, वे आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित करेंगे।


 (लेखक श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, मध्यप्रदेश सरकार में राज्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग हैं।)

Saturday, August 10, 2024

मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना की जानकारी

योजना का नाम- मुख्यमंत्री कृषक मित्र योजना


योजना कब से प्रारंभ की गयी- 21-09-2023


योजना का उद्देश्य- कृषक/ कृषकों के समूह को स्थायी पम्प कनेक्शन देने हेतु वितरण कम्पनी द्वारा आवश्यक अधोसंरचना निर्माण किया जाना


लाभार्थी के लिए आवश्यक शर्ते / लाभार्थी चयन प्रक्रिया- न्यूनतम 3 हार्सपावर एवं उससे अधिक क्षमता के कृषि पंप कनेक्शन हेतु वर्तमान में विद्यमान अधोसंरचना से 200 मीटर की अधिकतम दूरी तक 11 केव्हीर लाईन विस्ताीर कार्य एवं वितरण ट्रांसफार्मर स्था0पना का कार्य तथा पंप कनेक्शान तक निम्नरदाब लाईन विस्ता र कार्य एबी केबल के माध्यरम से वितरण कंपनी द्वारा कराया जायेगा।


लाभार्थी वर्ग- भूमिधारी कृषकों


लाभार्थी का प्रकार- किसान


लाभ की श्रेणी- अनुदान


योजना का क्षेत्र- Urban and Rural


आवेदन/संपर्क/पंजीयन/प्रशिक्षण कहाँ करें- ऑनलाइन


आवेदन प्रक्रिया- योजना अंतर्गत ऑनलाइन प्रक्रिया से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे। योजना लागू होने की तिथि से 2 वर्षो तक प्रभावशील रहेगी।प्रथम वर्ष में 10000 पम्पो का लक्ष्य रखा गया है।


आवेदन शुल्क- वितरण कम्पनी के नियमानुसार


अनुदान /ऋण /वित्तीय सहायता /पेंशन/लाभ की राशि- अधोसंरचना विकास लागत की केवल 50 प्रतिशत राशि का वहन संबंधित कृषक/ कृषकों के समूह द्वारा किया जाएगा।


हितग्राहियों को राशि के भुगतान की प्रक्रिया / हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था /वित्तीय प्रावधान- हितग्राहियों को अधोसंरचना विकास लागत का केवल 50 प्रतिशत राशि का वहन करना होगा, 40 प्रतिशत राशि अनुदान के रूप में राज्यि शासन द्वारा सीधे विद्युत वितरण कंपनी को दी जायेगी।शेष 10 प्रतिशत राशि का वहन विद्युत वितरण कंपनी द्वारा किया जायेगा।


ऑनलाइन आवेदन हेतु लिंकhttps://energy.mp.gov.in


(स्रोत- ऊर्जा विभाग)

Thursday, January 25, 2024

पीएम जनमन योजना की बिन्दुवार सम्पूर्ण जानकारी


प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्‍याय महाअभियान (पीएम जनमन)- प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) भारत सरकार द्वारा 15 नवंबर, 2023 को शुरू की गई एक पहल है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। यह अभियान इन समूहों को सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, बेहतर सड़क और दूरसंचार संपर्क, तथा स्थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएँ प्रदान करने पर केंद्रित है। जनजातीय कार्य मंत्रालय इस पहल के क्रियान्वयन के लिए नोडल मंत्रालय है, जो संबंधित मंत्रालयों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करता है।  

योजना कब से प्रारंभ की गयी- इस योजना को 15 नवंबर,2023 को झारखंड के 'जनजातीय गौरव दिवस' के अवसर पर प्रारंभ किया गया। 

योजना के बारे में-

  • इस योजना को 'पीएम जनमन' के नाम से भी जाना जाता है।
  • इस योजना की घोषणा पहली बार बजट 2023-24 के दौरान की गई थी।
  • इस योजना में आदिवासी कल्याण के लिए बजट छह गुना बढ़ा दिया गया है।
  • केंद्र इस मेगा योजना पर 24,000 करोड़ रुपये खर्च करेगा।
  • 'पीएम जनमन' के तहत सरकार आदिवासी समूहों और आदिम जनजातियों तक पहुंचेगी, जिनमें से अधिकांश अभी भी जंगलों में रहते हैं।
  • यह योजना 75 पीवीटीजी के लिए नौ मंत्रालयों के द्वारा 11 क्षेत्रक की डिलीवरी पर ध्यान केंद्रित करेगी।
  • 11 क्षेत्रक हैं- पीवीटीजी की बिखरी, दूरस्थ और दुर्गम बस्तियों को सड़क, दूरसंचार कनेक्टिविटी, बिजली, सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण तक बेहतर पहुंच और स्थायी आजीविका के अवसरों जैसी सुविधाओं से संतृप्त करना है।

योजना का उद्देश्य- विशेष पिछड़ी समुह अंतर्गत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समुह, समुदायों, बस्तियों के बुनियादी ढांचें में सुधार करना तथा स्‍वास्‍थ्‍य, शिक्षा, आजीविका के अंतराल को दूर कर इन समुदायों की सामाजिक आर्थिक स्थिति में सुधार करना है। साथ ही पीवीटीजी परिवारों को सुरक्षित आवास, स्‍वच्‍छ, पेयजल, शिक्षा, स्‍वास्‍थ्‍य सुविधा तक बेहतर पहुंच तथा बेहतर सड़क, बिजली, दुरसंचार कनेक्टिविटी तथा स्‍थायी आजीविका के अवसर जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्‍ध कराना है।

लाभार्थी के लिए आवश्यक शर्ते / लाभार्थी चयन प्रक्रिया- विशेष पिछड़ी जनजाति

लाभार्थी वर्ग- अनुसूचित जनजाति

लाभार्थी का प्रकार- छात्र ,छात्रा ,महिला ,पुरुष ,बेरोजगार

लाभ की श्रेणी- शिक्षा ,स्वास्थ्य सुविधा ,भोजन ,छात्रावास ,व्यवसाय ,श्रमिक कार्य ,अन्न वितरण ,प्रशिक्षण ,आवास ,राशन ,जल-आपूर्ति ,निःशुल्क उपचार तथा उपचार उपरांत फ़ॉलोअप ,हितग्राही मूलक कार्य

योजना का क्षेत्र- शहरी और ग्रामीण

आवेदन/संपर्क/पंजीयन/प्रशिक्षण कहाँ करें- संबंधित जिला कलेक्‍टर/सहायक आयुक्‍त/जिला संयोजक जनजातीय कार्य एवं योजना से संबंधित विभागीय अधिकारी

आवेदन शुल्क- नहीं

अनुदान /ऋण /वित्तीय सहायता /पेंशन/लाभ की राशि- भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश अनुसार

हितग्राहियों को राशि के भुगतान की प्रक्रिया / हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था /वित्तीय प्रावधान- भारत सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देश अनुसार

पीएम जनमन योजना के लाभ-

  • पीएम जनमन योजना के चलते जनजातीय समूह के जीवन स्तर में सुधार हेतु प्रयास किए जाएंगे।
  • लाभार्थियों के लिए आधार कार्ड, राशन कार्ड तथा अन्य महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट बनाए जाएंगे जिससे कि अन्य नागरिकों की तरह इन नागरिकों को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहे।
  • पीएम किसान सम्मान निधि योजना, किसान क्रेडिट कार्ड तथा आयुष्मान कार्ड इन योजनाओं का लाभ भी जनजातिय समूह के लाभार्थियों को प्रदान किया जाएगा।
  • पावर, सुरक्षित घर, पीने का साफ पानी, पोषण तथा बेहतर पहुंच, शिक्षा, टेलीफोन कनेक्टिविटी, पीवीटीजी क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सफाई आदि निम्नलिखित सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
  • सुविधाओं के मिलने के चलते आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय समूहों कि नागरिकों की आर्थिक स्थिति के अंतर्गत सुधार देखने को मिलेगा अनेक प्रकार के बेहतर विकल्प उनके लिए उपलब्ध रहेंगे।

Sunday, October 29, 2023

PM विश्वकर्मा योजना की जानकारी


PM विश्वकर्मा योजना
-विश्वकर्मा योजना, जिसे प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना (पीएम विश्वकर्मा) भी कहते हैं, भारत सरकार की एक केंद्रीय क्षेत्र योजना है, जिसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों के लिए शुरू किया गया है. इस योजना का उद्देश्य पारंपरिक शिल्पकारों को उनके उत्पादों और सेवाओं में सुधार करने के लिए शुरू से अंत तक सहायता प्रदान करना है, जिसमें ऋण सहायता, कौशल प्रशिक्षण और डिजिटल भुगतान के लिए प्रोत्साहन शामिल हैं।  


योजना कब से प्रारंभ की गयी- 17-09-2023


विश्वकर्मा योजना में कितने रुपए मिलते हैं?

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत लाभार्थी कुल 3 लाख रुपये का लोन ले सकता है। हालांकि, इस लोन को कुल दो चरणों में दिया जाता है। इसमें पहले चरण में 1 लाख रुपये व्यवसाय को शुरू करने के लिए दिए जाते हैं। वहीं दूसरे चरण में व्यवसाय के विस्तार के लिए 2 लाख रुपये दिए जाते हैं।


योजना का उद्देश्य

  • कारीगरों और शिल्पककारों को विश्वकर्मा के रूप में मान्यंता देना और उन्हें योजना के तहत सभी लाभ प्राप्त‍ करने केेलिए पात्र बनाना। 
  • उनके कौशल को निखारने के लिए कौशल उन्नयन प्रदान करना और उनके लिए प्रासंगिक और उपयुक्त् प्रशिक्षण अवसर उपलब्ध कराना। 
  • उनकी क्षमता, उत्पादकता और उत्पादों की गुणवत्ता बढाने के लिए बेहतर और आधुनिक उपकरणों के लिए सहायता प्रदान करना।
  • इच्छित लाभार्थियों को कोलेटरल फ्री ऋण तक आसान पहुंच प्रदान करना और ब्याज छूट प्रदान करके ऋण की लागत को कम करना। 
  • इन विश्वकर्माओं के डिजिटल सशक्तिकरण को प्रोत्सा हित करने के लिए डिजिटल लेनदेन के लिए प्रोत्साकहन प्रदान करना। 
  • विकास के नए अवसरों तक पहुचाने में मदद करने के लिए ब्रांड प्रचार और बाजार लिंकेज केे लिए एक मंच प्रदान करना।


लाभार्थी के लिए आवश्यक शर्ते / लाभार्थी चयन प्रक्रिया

  • स्व-रोजगार के आधार पर असंगठित क्षेत्र में हाथ और औजारों से काम करने वाले और योजना में उल्लेखित 18 परिवार आधारित पारंपरिक व्यगवसायों में से एक में लगे एक कारीगर या शिल्प कार, पी0एम0 विश्व कर्मा के तहत पंजीकरण के लिए पात्र होेगे। 
  • पंजीकरण की तिथि पर लाभार्थी की न्यूपनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। 
  • लाभार्थी को पंजीकरण की तिथि पर संबंधित व्याीपार में संलग्न होना चाहिए और स्व -रोजगार/व्यजवसाय विकास के लिए केन्द्र सरकार या राज्यं सरकार की समान क्रेडिट आधारित योजनाओं, जैसे पीएमईजीपी, पीएम स्वीनिधि, मुद्रा के तहत ऋण नहीं लेना चाहिए। पिछले 5 वर्षो में। 
  • योजना के तहत पंजीकरण और लाभ परिवार के एक सदस्ये तक ही सीमित रहेगा। योजना के तहत लाभ प्राप्तर करने के लिए, एक परिवार को पति, पत्नि और अविवाहित बच्चों के रूप में परिभाषित किया गया है। 5. सरकारी सेवा में कार्यरत व्योक्ति और उनके परिवार के सदस्य इस योजना के तहत पात्र नहीं होंगे।


लाभार्थी वर्ग- सामान्य ,अन्य पिछड़ी जाति ,अनुसूचित जाति ,अनुसूचित जनजाति ,अल्पसंख्यक ,गरीबी रेखा से नीचे के लिए ,सभी के लिए ,अन्य ,भूमिधारी कृषकों ,समस्त नाबालिक(18 वर्ष से कम) ,सभी वर्ग के सीमान्त एवं लघु कृषक ,सभी वर्ग के पशुपालक ,सभी वर्ग के बी.पी.एल. हितग्राही ,असंगठित कर्मकार मण्डल कार्ड धारी ,पीडित महिला ,मंडल द्वारा पंजीकृत निर्माण श्रमिक ,ग्रामीण गरीब वर्ग के लघु व्‍यापारी ,कोविड 19 महामारी के कारण मृत माता पिता की अनाथ संताने


लाभार्थी का प्रकार- 18 ट्रेड से समन्धित परम्परागत कारीगर


लाभ की श्रेणी- ऋण ,अनुदान ,छात्रावास ,प्रोत्साहन राशि ,प्रशिक्षण ,ब्याज ,स्टायपन्ड एवं किट


योजना का क्षेत्र- शहरी और ग्रामीण


पीएम विश्वकर्मा का लोन कैसे मिलेगा?

पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत लोन पाने के लिए सबसे पहले आपको आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा, फिर एक बैंक (जैसे इंडियन बैंक या पंजाब नेशनल बैंक) में आवेदन करें और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। यह योजना पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों को कौशल प्रशिक्षण, बेहतर उपकरण खरीदने के लिए वित्तीय सहायता और बाजार तक पहुंच प्रदान करती है। 


आवेदन/संपर्क/पंजीयन/प्रशिक्षण कहाँ करें

ट्रेड से संबंधित परंपरागत कारीगर पात्र होने पर पी.एम. विश्वडकर्मा पोर्टल पर सामान्य सेवा केन्द्रों (CSC) के माध्यम से आधार एथेन्टीकेशन के द्वारा आवेदन https://pmvishwakarma.gov.in/ पर पंजीकृत किए जाने का प्रावधान है | 


आवेदन प्रक्रिया

ट्रेड से संबंधित परंपरागत कारीगर पात्र होने पर पी.एम. विश्वडकर्मा पोर्टल पर सामान्य सेवा केन्द्रों (CSC) के माध्यलम से आधार एथेन्टीकेशन के द्वारा आवेदन पंजीकृत किए जाने का प्रावधान है। 

Stage-1 कारीगरों द्वारा पोर्टल पर आवेदन दर्ज किए जाने के उपरांत उनका सत्यारपन ग्राम पंचायत/नगरीय निकाय द्वारा किया जाकर ऑनलाईन जिला स्तरीय क्रियान्वतयन समिति को अग्रेषित किए जाते है। 

Stage -2 जिला स्तरीय क्रियान्वरयन समिति, ग्राम पंचायत/नगरीय निकायों द्वारा अग्रेषित आवेदनों का परीक्षण कर पात्र होने पर राज्यर स्तरीय स्क्रीयनिंग समिति को अग्रेषित किए जाते है। 

Stage-3 राज्य स्तरीय स्क्रीानिंग समिति सूक्ष्मी, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार कार्यालय पोलोग्राउण्ड/ इन्दौर द्वारा जिला स्त्रीय क्रियान्वीयन समिति से ऑनलाईन प्राप्तष आवेदनों का अनुमोदन एवं पी0एम0 विश्वदकर्मा प्रमाण-पत्र तथा पहचान पत्र जारी किए जाते है। 

Stage-4 राज्य स्तरीय स्क्रीनिंग समिति द्वारा पी0एम0 विश्वलकर्मा प्रमाण-पत्र तथा पहचान पत्र जारी किए जाने के पश्चा-त कारीगरों के आवेदन प्रशिक्षण तथा टूलकिट वितरण हेतु कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा चिन्हांकित राज्यि में स्थित 95 प्रशिक्षण केन्द्रोंप/आईटीआई को ऑनलाईन प्रेषित किए जाते है। साथ ही साथ डिजीटल ट्रांसजेक्शकन के लिए बैंकिग डिटेल तथा एप्लीशकेशन बैंक को फारवर्ड की जाती है।


आवेदन शुल्क- नि:शुल्‍क


अनुदान /ऋण /वित्तीय सहायता /पेंशन/लाभ की राशि

स्‍क्रीनिंग कमेटी द्वारा हितग्राहियों के आवेदन ऑनलाईन बैकों का प्रेषण। बैकों द्वारा योजना नियमानुसार हितग्राहियों को लाभान्वित किया जाएगा। रूपये 1.00 लाख 18 माह की अवधि के लिए तथा द्वितीय भाग रूपये 2.00 लाख 30 माह की अवधि के लिए कोलैटरल फ्री ऋण बैकों द्वारा स्‍वीृत किया जाएगा। भारत सरकार द्वारा प्रतिशत ब्‍याज अनुदान आर्थिक सहाायता दी जाएगी।


हितग्राहियों को राशि के भुगतान की प्रक्रिया / हितग्राहियों को ऋण एवं अनुदान की व्यवस्था /वित्तीय प्रावधान- बैंकों के द्वारा/बैकों के माध्‍यम से।


ऑनलाइन आवेदन हेतु लिंक- https://pmvishwakarma.gov.in/


पीएम विश्वकर्मा की शिकायत कैसे करें?

पीएम विश्वकर्मा योजना की शिकायत करने के लिए, आप Champions Desk पर संपर्क कर सकते हैं, जो MSME मंत्रालय के तहत काम करता है, उनके ईमेल (champions@gov.in) या फ़ोन नंबर (011-23061574) पर। साथ ही, आप विभिन्न बैंकों की ग्राहक सेवा से भी संपर्क कर सकते हैं, जैसे बैंक ऑफ़ इंडिया, या सीधे सरकारी पोर्टल पर जाकर भी जानकारी ले सकते हैं। 


शिकायत करने के तरीके:

1- Champions Desk से संपर्क करें:

ईमेल: champions@gov.in 

फ़ोन नंबर: 011-23061574 


2- बैंक से संपर्क करें:

यदि आपका आवेदन किसी बैंक से संबंधित है, तो आप उस बैंक की ग्राहक सेवा से संपर्क कर सकते हैं। 


3- राष्ट्रीय पोर्टल देखें:

आप राष्ट्रीय पोर्टल पर योजना से संबंधित जानकारी ले सकते हैं और वहां दिए गए निर्देशों का पालन कर सकते हैं। 


4- राज्य हेल्पलाइन से संपर्क करें:

कुछ राज्यों में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर जैसे 181 भी हो सकते हैं, जिनके माध्यम से आप सहायता प्राप्त कर सकते हैं। 


5- अन्य जानकारी: 

लाभार्थियों का नामांकन और आवेदन प्रक्रिया पीएम विश्वकर्मा पोर्टल पर की जाती है, और इस पर तीन-चरणीय सत्यापन होता है।

शिकायत करने से पहले, सुनिश्चित करें कि आपके पास योजना से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी और दस्तावेज हों।


पीएम विश्वकर्मा योजना में अपना नाम कैसे चेक करें?

आप अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड के साथ प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की आधिकारिक वेबसाइट (pmvishwakarma.gov.in) पर लॉगिन करके या सामान्य सेवा केंद्रों (CSCs) पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति और लाभार्थियों की सूची की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यह योजना आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से लाभार्थियों का नामांकन करती है। 

पीएम विश्वकर्मा योजना में नाम चेक करने की प्रक्रिया

  • आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ: सबसे पहले प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना की आधिकारिक वेबसाइट pmvishwakarma.gov.in पर जाएँ। 
  • लॉगिन करें: होमपेज पर आपको "Login" का विकल्प मिलेगा, जिस पर क्लिक करें। 
  • विवरण दर्ज करें: यहां अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड दर्ज करें। 
  • लॉगिन पर क्लिक करें: विवरण दर्ज करने के बाद "Login" बटन पर क्लिक करें। 
  • स्थिति देखें: आप अपने आवेदन की स्थिति देख पाएंगे या लाभार्थियों की सूची की जानकारी प्राप्त कर पाएंगे।


वैकल्पिक तरीका (सामान्य सेवा केंद्र)-

आप अपने निकटतम सामान्य सेवा केंद्र (CSC) पर जाकर भी इस योजना के तहत अपना नामांकन और आवेदन की स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। यहां के कर्मचारी आपको आधार-आधारित बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से प्रक्रिया में मदद करेंगे। 

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